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हिंदी दिवस 2026: किताबों-स्क्रीन की हिंदी में बढ़ा अंतर, डिजिटल दौर ने गढ़ ली अपनी ही भाषा

Mon, 14 Sep 2026 01:25 PM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

Hindi Diwas 2026: मोबाइल चैट, सोशल मीडिया, रील्स और गेमिंग ने हिंदी के इस्तेमाल का अंदाज बदल दिया है। जेन जी हिंदी से दूर नहीं हुई है, लेकिन डिजिटल संवाद में रोमन लिपि, अंग्रेजी शब्दों, शॉर्ट फॉर्म और इमोजी का इस्तेमाल बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चुनौती हिंदी के समृद्ध शब्द भंडार और देवनागरी लेखन की निरंतरता बनाए रखने की है।
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हिंदी दिवस 2026 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भावनाओं को सबसे सहज ढंग से व्यक्त करने वाली हिंदी अब डिजिटल स्क्रीन पर पहुंचते-पहुंचते अपना रंग बदल रही है। जेन जी की बातचीत में हिंदी मौजूद तो है, लेकिन उसका स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। मोबाइल चैट, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, रील्स और गेमिंग की दुनिया ने युवाओं को हिंदी के ऐसे नए संस्करण से जोड़ दिया है, जिसमें हिंदी के साथ अंग्रेजी के शब्द, रोमन लिपि, शॉर्ट फॉर्म और इमोजी खूब घुल-मिल गए हैं।

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स्कूल की किताबों में जेन जी को व्याकरण, वर्तनी, मुहावरे और साहित्य पढ़ाया जाता है, लेकिन स्क्रीन पर उसे दूसरी तरह की हिंदी मिलती है। सोशल मीडिया पर लोकप्रिय कंटेंट में शुद्ध हिंदी की तुलना में हिंग्लिश और बोलचाल की भाषा ज्यादा दिखाई देती है। ऐसे में किताबों की हिंदी और डिजिटल हिंदी के बीच अंतर बढ़ रहा है। जेन जी का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा की बातचीत में हिंदी का इस्तेमाल करता है। दोस्तों के साथ बातचीत, परिवार से संवाद और स्थानीय स्तर पर बोलचाल में हिंदी की पकड़ अब भी मजबूत है। बदलाव लिखने के तरीके में सबसे ज्यादा दिखाई देता है। मोबाइल पर हिंदी टाइप करने के बजाय रोमन में हिंदी लिखना आसान लगता है। अंग्रेजी कीबोर्ड पर रोमन में हिंदी लिखना तेज है, ऑटो-करेक्ट और प्रेडिक्टिव टेक्स्ट मदद करते हैं और सोशल मीडिया की भाषा भी इसी ढर्रे पर तैयार हुई है। 

डिजिटल संवाद ने हिंदी और अंग्रेजी के बीच एक नई भाषाई जमीन तैयार कर दी है, जिसे हिंग्लिश कहा जा रहा है। इसमें एक ही वाक्य में हिंदी और अंग्रेजी दोनों सहज रूप से शामिल हो जाते हैं। कई बार एक पूरा वाक्य लिखने के बजाय एक इमोजी भाव व्यक्त कर देता है। हंसी, गुस्सा, प्यार, हैरानी, सहमति या असहमति हर भाव के लिए डिजिटल दुनिया में एक प्रतीक मौजूद है। इससे संवाद आसान जरूर हुआ है, लेकिन भाषा के जरिये भावों को विस्तार देने की आदत कमजोर होने की चिंता भी सामने आती है।

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हिंदी से दूरी नहीं, बदला है अंदाज
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और राज्य के पूर्व शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा के मुताबिक, हिंदी से दूरी नहीं, उसका रूप बदल रहा है। नई पीढ़ी हिंदी बोल रही है, लेकिन डिजिटल दौर में नए अंदाज में। असली चुनौती हिंदी के समृद्ध शब्द भंडार और देवनागरी लेखन की निरंतरता बचाने की है। सोशल मीडिया पर रील्स, पॉडकास्ट, मीम्स, कविता और वेब कंटेंट हिंदी को युवाओं तक नए तरीके से पहुंचा रहे हैं। यानी हिंदी डिजिटल दुनिया से बाहर नहीं हुई, बल्कि डिजिटल दुनिया में अपना नया रूप गढ़ रही है।

बदले शब्दों के साथ बदला भाषा का मिजाज
1900 के आसपास हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके लिखित रूप को एकरूप बनाने की थी। 1920 से 1950 के बीच स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य और सार्वजनिक जीवन के विस्तार के साथ हिंदी का सामाजिक आधार बढ़ा। 1950 से 1990 के बीच शिक्षा, प्रशासन, आकाशवाणी, सिनेमा और दूरदर्शन ने हिंदी के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाया। 1991 के बाद आर्थिक उदारीकरण, निजी टेलीविजन, विज्ञापन और बाजार के विस्तार ने हिंदी को नए भाषाई माहौल से जोड़ा। 2010 के दशक में सामाजिक माध्यमों ने इस प्रक्रिया को और तेज किया। 2026 की हिंदी इसलिए एकरूप भाषा नहीं है। साहित्य, शिक्षा, प्रशासन, समाचार, मनोरंजन, बाजार और डिजिटल मंचों में इसके अलग-अलग रूप हैं।
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