शिमला। गंज बाजार में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन रविवार को राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे बजे पूजा एवं कलश स्थापना से हुई। 12 बजे तक श्रीमद्भागवत का मूल पाठ किया गया। शाम 3:30 बजे कथावाचक आचार्य विनोद शर्मा ने बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान का स्रोत है। कलियुग में भगवान की भक्ति, सत्संग और भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है। ऋषियों द्वारा सूत से किए गए प्रश्नों, राजा परीक्षित को प्राप्त शाप और मोक्ष प्राप्ति के लिए उनके प्रयासों का विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य शर्मा ने कहा कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक क्षण धर्म, भक्ति एवं मानव सेवा में लगाना चाहिए। राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर भगवान की शरण ग्रहण की और शुकदेव से परम कल्याण का मार्ग पूछा। इसी दिव्य संवाद के रूप में श्रीमद्भागवत महापुराण का ज्ञान संसार को प्राप्त हुआ। सनातन धर्म सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि 14 जून तक चलने वाली यह कथा प्रतिदिन शाम 3:30 बजे से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर सभा के प्रधान अजय सूद और महासचिव धर्मपाल पुरी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।