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Shimla News: दिवाली त्योहार पर नकली हरित पटाखे चलाने से बचें

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की हिदायत
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दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक ही जला सकेंगे पटाखे

हर्षित शर्मा
शिमला। दिवाली के करीब आते ही बाजारों में पटाखों की बिक्री शुरू हो गई है, लेकिन लोगों को नकली हरित पटाखों से सतर्क रहना जरूरी है। कई बार व्यापारी हरित पटाखों के नाम पर पारंपरिक पटाखे बेचते हैं, जिनमें हानिकारक रसायन होते हैं। यह वातावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक हैं। यह हिदायत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की है।

पारंपरिक पटाखों में बैरियम नाइट्रेट और अन्य जहरीले रसायन पाए जाते हैं, जिनके जलने से नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और श्वास रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस बारे में बोर्ड के अधिकारियों ने हिदायत जारी की है। शहर में में लोग दिवाली पर 2 घंटे रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जला सकेंगे।
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हरित पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं। इनमें हानिकारक रसायनों का प्रयोग नहीं होता और ध्वनि स्तर भी नियंत्रित रहता है। सामान्य पटाखों का शोर 160 डेसिबल तक पहुंच सकता है, प्रमाणित हरित पटाखों से निकलने वाली आवाज 110 से 125 डेसिबल के बीच रहती है। इसके अलावा, हरित पटाखों का निर्माण भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और राष्ट्रीय पर्यावरणीय इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किया है। नकली हरित पटाखों में यह सुरक्षा मानक नहीं होते। कई बार इन पटाखों को असली हरित पटाखों की तरह पैक किया जाता है, लेकिन इनमें पारंपरिक पटाखों जैसी सामग्री मिलाई जाती है। इनके उपयोग से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ने के साथ थ आग और अन्य सुरक्षा जोखिम भी पैदा होते हैं।


नकली पटाखों से ऐसे बचें

केवल प्रमाणित विक्रेता से ही हरित पटाखे खरीदें। पैकेजिंग पर सुरक्षा निर्देश, निर्माण तिथि और प्रयोग की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। पटाखों के शोर और रसायन संबंधी जानकारी जांचें। यदि किसी पैकेज पर प्रमाणीकरण नहीं है या लेबल अस्पष्ट है, तो उसे न खरीदें। तीसरा सरकारी निर्देशों का पालन करें। केवल सीएसआईआर और एनईईआरआई के मान्यता प्राप्त हरित पटाखों का उपयोग करना सुरक्षित है।
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दिवाली पर न जलाएं पटाखे
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कुसुम कुमारी ने कहा है कि दिवाली पर प्रदूषण और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हरित दिवाली वही है जिसमें लोग पटाखे ना जलाएं। तभी दिवाली पर होने वाले प्रदूषण में कमी होगी। लोगों को हरित पटाखे जलाने से भी बचना चाहिए।
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