श्रीगंगानगर के कालूसर गांव में 10.37 हेक्टेयर जमीन पर कई फसल बीमा पॉलिसियां बनाकर 31.15 लाख रुपये का क्लेम उठाने का मामला सामने आया। कृषि विभाग ने किसानों और ई-मित्र संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने का सिलसिला जारी है। टोंक और जयपुर के बाद अब श्रीगंगानगर जिले में भी बीमा पॉलिसियों के नाम पर गड़बड़ी सामने आई है। सूरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में वास्तविक क्षेत्रफल से करीब सात गुना अधिक जमीन का फसल बीमा कराकर 31.15 लाख रुपये से ज्यादा का क्लेम उठाने का मामला सामने आया है। कृषि विभाग ने मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
एक ही खसरे पर कई पॉलिसियां
बनवारी लाल ने सीएससी यानी ई-मित्र संचालक विकास कुमार के माध्यम से 10.37 हेक्टेयर और संचालक बिजेश के माध्यम से 10.30 हेक्टेयर जमीन का अलग-अलग बीमा कराया। इन पॉलिसियों के आधार पर बनवारी लाल ने कुल 23,35,319 रुपये का बीमा क्लेम हासिल किया।
बटाईदार ने भी उसी जमीन पर कराया बीमा
मामला यहीं नहीं रुका। बनवारी लाल ने इसी खसरा नंबर की जमीन रिछपाल नामक व्यक्ति को बटाई पर दे रखी थी। रिछपाल ने भी इसी जमीन पर बोई गई मूंगफली की फसल का बीमा करा लिया। इस पॉलिसी के आधार पर उसे 7,80,195 रुपये का बीमा क्लेम मिला। इस तरह दोनों ने मिलकर कुल 31,15,514 रुपये का अनुचित लाभ उठाया। हालांकि, इसी जमीन पर अन्य लोगों की ओर से कराई गई कुछ पॉलिसियों को बीमा कंपनी ने निरस्त कर दिया था।
टोंक और जयपुर में भी सामने आया फर्जीवाड़ा
विभाग ने टोंक जिले की मालपुरा तहसील के किसान मुकेश सैनी पुत्र फूलचंद सैनी, सीताराम सैनी पुत्र फूलचंद सैनी और फूलचंद पुत्र हजारी लाल सैनी तथा जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील के दीपक सैनी पुत्र दिनेश सैनी और विनिता सैनी पत्नी सीताराम सैनी सहित संबंधित ई-मित्र संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कराने का फैसला किया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीना ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत किसी भी सरकारी योजना में फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।