सरपंचों के लिए जरूरी नियम, नामांकन से पहले छोड़नी होगी प्रशासक की कुर्सी सार राजस्थान में पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक निवर्तमान सरपंचों को नामांकन दाखिल करने से पहले प्रशासक पद से विधिवत पदमुक्त होना होगा। केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती राज विभाग के 31 अगस्त 2026 के आदेश के तहत जिला कलेक्टर ऐसे इस्तीफे स्वीकार कर पदमुक्ति के आदेश जारी कर सकते हैं।
राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक निवर्तमान सरपंचों को अब नामांकन दाखिल करने से पहले अपने प्रशासक पद से इस्तीफा देकर पदमुक्त होना अनिवार्य होगा। राज्य में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में निर्वर्तमान सरपंचों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई थी। राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल इस्तीफा देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले पदमुक्ति का आदेश जारी होना जरूरी है। यदि नामांकन से पूर्व त्यागपत्र मंजूर नहीं हुआ तो दावेदार का नामांकन पत्र खारिज हो जाएगा।
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नामांकन से पूर्व पदमुक्ति जरूरी
प्रदेश की 10,290 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में निर्वर्तमान सरपंच ही प्रशासक के रूप में काम संभाल रहे हैं। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विभाग के 31 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार जिला कलेक्टर प्रशासक के रूप में कार्यरत निर्वर्तमान सरपंचों का इस्तीफा स्वीकार करके उन्हें पदमुक्त करने के आदेश जारी कर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार सभी ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को एक साथ हटाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है।
पंचायती राज अधिनियम के प्रावधान
पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रशासकों के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 36 में निर्वाचित सरपंच सहित विभिन्न पदाधिकारियों के इस्तीफे का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत सरपंच अपना इस्तीफा विकास अधिकारी को दे सकता है। सामान्य स्थिति में यह इस्तीफा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम प्राप्त होने के 15 दिन बाद प्रभावी होता है। इस नियम के चलते निर्वर्तमान सरपंचों के लिए पहले इस्तीफा और उसकी मंजूरी का फार्मूला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।