पंचायती राज विभाग के सचिव डॉ. जोगाराम ने पंचायत चुनाव के सिलसिले में लॉटरी निकालकर राजस्थान के 41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख के पदों के लिए वर्गवार आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्य में निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार प्रत्येक संभाग से कम से कम एक महिला जिला प्रमुख का होना अनिवार्य है।
जिला परिषदों और ग्राम पंचायतों का गणित
राजस्थान की 14,403 ग्राम पंचायतों में कुल 1,30,282 वार्ड हैं। वहीं 41 जिला परिषदों में 1,403 वार्ड तथा 457 पंचायत समितियों में 8,221 वार्ड शामिल हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए नागौर, डीडवाना-कुचामन, पाली और सवाई माधोपुर के पद अनारक्षित रखे गए हैं।
अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए दौसा, धौलपुर, टोंक और भरतपुर जिला परिषदें तय की गई हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बालोतरा और जैसलमेर को रखा गया है, जबकि सलूंबर, प्रतापगढ़ तथा अलवर अनुसूचित जनजाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुए हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग व महिला आरक्षण स्थिति
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जालौर, बूंदी और खैरथल-तिजारा के जिला प्रमुख पद आरक्षित हुए हैं। ब्यावर और सीकर में अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को स्थान मिलेगा। सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए फलोदी, बीकानेर, कोटा, चूरू, अजमेर, झुंझनू, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डीग, श्रीगंगानगर और झालावाड़ के पद आरक्षित किए गए हैं।
बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जयपुर, करौली, जोधपुर, सिरोही, उदयपुर, कोटपुतली बहरोड़ और राजसमंद के पद अनारक्षित रहेंगे। लॉटरी प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संभागवार महिला आरक्षण नियम पर सवाल उठाए और नियम की प्रति देखने की मांग की, जिससे अधिकारियों के साथ नोकझोंक हुई।
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नगर निकायों में सीटों का पूरा समीकरण
प्रदेश के 309 शहरी निकायों में से 121 सीटें आरक्षित हैं, जबकि 188 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं। आरक्षित सीटों में अनुसूचित जाति के पास 50 पद हैं, जिनमें 16 पद महिलाओं के लिए हैं। अनुसूचित जनजाति के पास 11 सीटें हैं, जिनमें तीन पद महिलाओं के लिए तय हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग को 60 सीटें मिली हैं, जिनमें 21 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं।