राजस्थान में बजट सत्र आहूत करने की तारीख का ऐलान हो चुका है। इस साल 28 जनवरी से बजट सत्र शुरू होगा। संभावना है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह में राज्य सरकार अपना बजट पेश कर दे। बजट को लेकर सरकार के स्तर पर तैयारियां शुरू की जा चुकी हैं। बजट में प्लान और रेवेन्यू सेक्टर की अलग-अलग बैठकें हो चुकी हैं। अब स्टेक होल्डर्स से संभागवार बैठकें होनी हैं।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के फंडिंग पैटर्न में बदलाव किए जाने का असर राज्य सरकार पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले बजट में कम से कम 2 से ढाई हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड का प्रबंधन करना होगा, वहीं एक बड़ी चुनौती बचे हुए समय में लगभग 50 प्रतिशत बजट को खर्च करने की भी है। इसके लिए कर्ज की रफ्तार भी बढ़ेगी।
विधानसभा में नया बजट पेश करने के साथ भजनलाल सरकार को इस वित्त वर्ष में हुए खर्च का ब्योरा भी रखना होगा। सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए 3.80 लाख करोड़ का बजट पेश किया था, इसमें से नवंबर तक 1 लाख 92 हजार 968 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। अब सिर्फ 4 महीने बाकी हैं और लगभग आधा बजट खर्च होना बाकी है।
जो पैसा खर्च भी हुआ है, उसमें से 22 हजार 675 करोड़ रुपए कर्ज के ब्याज की अदायगी में, 50182 करोड़ रुपए वेतन-भत्ते, 21591 करोड़ रुपए पेंशन और 21 हजार 398 करोड़ रुपए सब्सिडी पर खर्च हुए हैं।
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अब तक 43 हजार करोड़ से ज्यादा कर्ज
राज्य सरकार पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार ने इस बार बजट में 83 हजार करोड़ रुपए का कर्ज अनुमानित रखा है। इनमें से अब तक 43816 करोड़ रुपए का कर्ज सरकार ले चुकी है। इसके साथ ही राजस्थान पर कुल कर्ज इस साल बढ़कर 7 लाख 26 हजार करोड़ रुपए को पार कर सकता है।
डोटासरा बोले- 20 प्रतिशत घोषणाएं भी पूरी नहीं हुई
इधर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि सीएम ने अपने विधायकों से कहा है कि इस साल का बजट बहुत ही सामान्य देंगे, हमारे पास देने के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले के 2 बजट की 20 प्रतिशत घोषणाएं भी अब तक पूरी नहीं हुई हैं। डोटासरा ने कहा कि बजट में जिन योजनाओं की डीपीआर बनाने की घोषणा की गई थी, उनकी डीपीआर तक नहीं बनी है। एलीवेटेड रोड जैसी कई घोषणाएं तो ऐसी हैं, जिन्हें वित्त विभाग ने फिजिबल नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया।
डोटासरा के इस बयान का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि डोटासरा का बयान पूरी तरह राजनीतिक है। अधूरी घोषणाएं 18 से 23 वाली सरकार में होती थीं। इस सरकार में हर घोषणा पूरी हो रही है, चाहे जमीन आवंटन का मामला हो या कोई अन्य प्रोजेक्ट।
सरकार के लिए फंड अरेंज करना बड़ा चैलेंज
बजट एनालिसिस एंड रिसर्च सेंटर, जयपुर के निदेशक निसार अहमद का कहना है कि इस साल जो बड़ा बदलाव हुआ है, उसके अनुसार मनरेगा के लिए राज्य सरकार को तैयारी करनी पड़ेगी। सरकार को उसके लिए 2 से ढाई हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड रखना होगा। नवंबर तक रेवेन्यू रिसिट 50 प्रतिशत से कम रियलाइज हुआ है, जो काफी धीमा है। कैपिटल एक्सपेंडिचर 41 प्रतिशत ही है। सरकार की मशीनरी को तेजी से काम करने की जरूरत पड़ेगी। सरकार ने पिछले बजट में एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी की भी घोषणा की थी। आने वाले बजट में लोगों को काफी उम्मीदें होंगी।