राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने फर्जी एम.टेक. डिग्री प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए जलदाय विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेईएन) दुर्गाशंकर मेनारिया को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर भर्ती प्रक्रिया में कूटरचित शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत कर लाभ प्राप्त करने का आरोप है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी), अजमेर द्वारा वर्ष 2018-19 में समूह अनुदेशक, सर्वेयर एवं सहायक शिक्षिता सलाहकार ग्रेड-द्वितीय भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इस भर्ती में उदयपुर जिले के भीण्डर क्षेत्र निवासी दुर्गाशंकर मेनारिया ने आवेदन किया था। आवेदन के दौरान उसने मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश) से वर्ष 2010 से 2012 के बीच प्राप्त एम.टेक. (इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम) की डिग्री भी प्रस्तुत की थी।
साक्षात्कार के बाद अभ्यर्थी का चयन कर लिया
लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया। इसके बाद प्रशिक्षण कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग, प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, जोधपुर को दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई। सत्यापन नहीं होने पर विभाग की ओर से एसओजी थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कराया गया।
एसओजी ने विश्वविद्यालय से डिग्री का सत्यापन कराया
जांच के दौरान एसओजी ने विश्वविद्यालय से डिग्री का सत्यापन कराया। जांच में सामने आया कि आरोपी के नाम से ऐसी कोई एम.टेक. डिग्री जारी नहीं की गई थी। इसके बाद प्रस्तुत दस्तावेज को फर्जी और कूटरचित पाया गया। अनुसंधान में यह भी सामने आया कि संबंधित पद के लिए एम.टेक. डिग्री आवश्यक नहीं थी और केवल स्नातक योग्यता ही पर्याप्त थी। इसके बावजूद आरोपी ने स्वयं को अधिक योग्य दर्शाने के उद्देश्य से आवेदन में फर्जी डिग्री का उल्लेख किया।
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अनुभव प्रमाण-पत्र को भी अपनी योग्यता में शामिल किया
एसओजी के अनुसार आरोपी वर्तमान में जलदाय विभाग, भीण्डर में जेईएन के पद पर कार्यरत है। पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आया कि उसने इसी कथित फर्जी एम.टेक. डिग्री के आधार पर सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा स्थित माधव विश्वविद्यालय में वर्ष 2015 से 2020 तक सहायक तकनीकी अधिकारी के रूप में कार्य किया तथा वहां से प्राप्त अनुभव प्रमाण-पत्र को भी अपनी योग्यता में शामिल किया।
आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया
एसओजी ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे पुलिस अभिरक्षा में भेज दिया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्री किस माध्यम से और कितनी राशि देकर प्राप्त की गई। साथ ही आरोपी की बी.टेक. सहित अन्य शैक्षणिक डिग्रियों का भी सत्यापन कराया जा रहा है।