राजस्थान में स्थानीय स्वशासन के इतिहास में पहली बार पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण आबादी के आधार पर तय किया जाएगा। अब तक केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए जनसंख्या आधारित आरक्षण लागू था, जबकि ओबीसी आरक्षण लॉटरी (रोटेशन) प्रणाली से तय होता था। सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ओबीसी आरक्षण भी जनसंख्या के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 5 अगस्त तक ओबीसी आयोग को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। इसके बाद पंचायत और निकायों में ओबीसी आरक्षण तय किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को समयबद्ध चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और सरकार को सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट संबंधी निर्देशों का पालन करते हुए चुनाव कार्यक्रम प्रस्तुत करना होगा। बाद की सुनवाई में सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष चरणबद्ध चुनाव कार्यक्रम रखा, जिसके आधार पर चुनाव प्रक्रिया अगस्त से नवंबर के बीच पूरी करने की रूपरेखा सामने आई।
दो चरण में निकाय, चार चरण में पंचायत चुनाव
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पहले 309 नगरीय निकायों के चुनाव दो चरणों में होंगे। इसके लिए करीब 60 हजार कर्मचारी और 50 हजार पुलिसकर्मियों की आवश्यकता होगी। इन चुनावों में 10,245 वार्डों, 16,482 मतदान केंद्रों और 1.43 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल होंगे।
इसके बाद 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक चरण में लगभग 80 हजार कर्मचारी और 70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी होगी। पंचायत चुनावों में 45,316 मतदान केंद्रों पर 4.02 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।