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राजस्थान: बीकानेर महापौर चुनाव में क्रॉस वोटिंग से भाजपा में हलचल, शेखावत ने नेतृत्व को सौंपी रिपोर्ट

Thu, 01 Oct 2026 02:43 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

बीकानेर महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले, जबकि उपमहापौर पद के भाजपा प्रत्याशी पंकज गहलोत को 38 वोट मिले। वोटों के इस अंतर के बाद क्रॉस वोटिंग की जांच कर रिपोर्ट प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को सौंपी गई है। रिपोर्ट में करीब 10 पार्षदों के पार्टी के निर्देशों के मुताबिक मतदान नहीं करने की बात सामने आई है।
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सुरेंद्र सिंह शेखावत - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी के बीकानेर महापौर पद के प्रत्याशी रहे सुरेंद्र सिंह शेखावत ने महापौर चुनाव के दौरान पार्टी पार्षदों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग के संबंध में पार्टी के प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। पार्टी के निर्देश पर तैयार की गई इस रिपोर्ट को शेखावत ने जयपुर से लेकर दिल्ली तक संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। 21 सितंबर को हुए महापौर पद के चुनाव में पार्टी के पक्ष में मतदान न करने वाले पार्षदों की गतिविधियों की जांच के बाद यह कदम उठाया गया है। पार्टी के केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेतृत्व ने क्रॉस वोटिंग और अनुशासनहीनता की घटना को गंभीरता से लिया है। दूसरी ओर, शेखावत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने किसी भी पार्षद विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत शिकायत दर्ज नहीं कराई है और वे संगठन के सभी पार्षदों को साथ लेकर काम करना चाहते हैं।
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क्रॉस वोटिंग और चुनावी गणित
निगम चुनाव में महापौर का पद हासिल करने के लिए केवल 14 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी, जबकि भाजपा के पास अपने स्वयं के 27 पार्षद पहले से उपलब्ध थे। चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने की रणनीति के तहत प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत ने न केवल निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में साधा, बल्कि विपक्षी कांग्रेस के खेमे में भी सेंधमारी की थी। पार्टी के सभी पार्षदों को एकजुट रखने के उद्देश्य से बाड़ेबंदी की व्यवस्था की गई और इस पूरी प्रक्रिया पर भारी-भरकम धनराशि भी खर्च की गई। इसके बावजूद मतदान के परिणाम घोषित होने पर शेखावत को केवल 30 वोट ही प्राप्त हुए। इसके विपरीत, उपमहापौर पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे पार्टी प्रत्याशी पंकज गहलोत को 38 वोट हासिल हुए। मतों के इस स्पष्ट अंतर ने यह पूरी तरह उजागर कर दिया कि महापौर पद के चुनाव के समय ही पार्टी के पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की थी।

वोटिंग पैटर्न से पार्षदों की पहचान
पार्टी ने क्रॉस वोटिंग में लिप्त सदस्यों की पहचान करने के लिए मतदान से पूर्व ही एक विशेष वोटिंग पैटर्न निर्धारित किया था। इसके तहत पार्टी के सभी पार्षदों तथा समर्थन दे रहे निर्दलीय पार्षदों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे मतपत्र पर किस निर्धारित स्थान पर अपनी मोहर लगाएंगे। मतगणना के दौरान पार्टी के मतगणना एजेंट ने प्रत्येक मतपत्र को देखकर यह बारीकी से जांचा कि तय स्थान पर मोहर लगी है अथवा नहीं। जिन सदस्यों के मतपत्रों पर निर्धारित स्थान पर मोहर नहीं पाई गई, उनके मतों को क्रॉस वोटिंग की श्रेणी में रखा गया। इसी तकनीकी जांच प्रक्रिया के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10 पार्षदों ने पार्टी के स्पष्ट निर्देशों का पालन करने के बजाय विपक्षी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था।
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संगठन नेतृत्व को सौंपी रिपोर्ट
सुरेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने पार्टी के संगठन महामंत्री अजय कुमार को भी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद, निकाय चुनाव के राज्य प्रभारी अरुण द्विवेदी को दिल्ली में यह रिपोर्ट दी गई। साथ ही, शेखावत ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से मुलाकात करके उन्हें भी संपूर्ण स्थिति से अवगत कराया। केंद्रीय मंत्री ने चुनाव में हुई इस धोखेबाजी को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा करने के लिए शेखावत को जयपुर आमंत्रित किया है।
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