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ऑपरेशन हार्ड बॉल: तीन साल अंडरकवर एजेंट बनकर किया काम, तोड़ा बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया का नेटवर्क

Thu, 09 Jul 2026 10:52 PM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

एजेंसियों के अंडरकवर एजेंट और मुखबिर ने कई मादक पदार्थों की खेप की डिलीवरी में सहयोग किया और इसी दौरान एजेंसियों ने गिरोह के संचालन, संपर्क सूत्रों, आर्थिक लेन-देन और ड्रग सप्लाई चेन से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत जुटाए।
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जग्गू भगवानपुरिया और लॉरेंस बिश्नोई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत विदेशी एजेंसियां तीन साल से अंडरकवर एजेंट बनकर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के नेटवर्क को खंगाल रही थीं। जुलाई 2023 से एजेंसियों ने जाल बिछा रखा था। जिसके तहत 24 आरोपी अभी तक हत्थे चढ़ चुके हैं। इसी मामले में पंजाब पुलिस का एक एसएचओ गुरजिंदर सिंह नागरा भी कथित रूप से इस मामले में फंस गया है। उसे भी आरोपी बनाया गया है।
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अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई (एफबीआई), ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईए), होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (एचएसआई) और कनाडा सहित कई अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने लगभग तीन वर्षों तक चले एक बड़े अंडरकवर ऑपरेशन के बाद लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है।  इसे 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' का नाम दिया गया था। जिसके तहत 37 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया जबकि 24 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, 10 अन्य आरोपित अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान करीब 1,000 किलोग्राम कोकीन, 1 किलोग्राम हेरोइन, 12 हथियार और लगभग 40 हजार अमेरिकी डॉलर नकद बरामद किए गए। इस दौरान न केवल मादक पदार्थों की तस्करी बल्कि संगठित अपराध, हथियारों की खरीद-फरोख्त, जबरन वसूली और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गठजोड़ के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई।
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मुखबिर के चुंगल में फंसे तस्कर
10 जुलाई 2023 को रविंदर सिंह ढांडा नाम के एक व्यक्ति ने अनजाने में एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जो अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का गोपनीय मुखबिर था। ढांडा ने उससे लॉस एंजिलिस तक कोकीन पहुंचाने में सहयोग मांगा। बस, यहीं से ये नेटवर्क एजेंसियों के राडार पर आ गया। 17 जुलाई को अमेरिका-कनाडा सीमा के निकट स्थित पीस आर्च हिस्टोरिकल पार्क में दोनों के बीच पहली गुप्त मुलाकात हुई। इस बैठक में सीमा पार कोकीन और मेथामफेटामिन की तस्करी के तरीकों पर चर्चा की गई। इसके बाद एजेंसियों ने मुखबिर के माध्यम से पूरे नेटवर्क में धीरे-धीरे अपनी पहुंच बनानी शुरू कर दी। 

एजेंसियों के अंडरकवर एजेंट और मुखबिर ने कई मादक पदार्थों की खेप की डिलीवरी में सहयोग किया और इसी दौरान एजेंसियों ने गिरोह के संचालन, संपर्क सूत्रों, आर्थिक लेन-देन और ड्रग सप्लाई चेन से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत जुटाए। मुखबिर ने गिरोह के सदस्यों का विश्वास जीत लिया और वह लगातार नेटवर्क के संपर्क में बना रहा।
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फंसाने के लिए एजेंटों ने की गिरोह की मदद
17 जून 2024 को भगवानपुरिया गिरोह के सदस्यों ने कथित तौर पर एक अंडरकवर एजेंट को 5 किलोग्राम कोकीन बेचने का प्रयास किया। नवंबर 2024 से जनवरी 2025 तक अमेरिकी एजेंसियां लगातार गिरोह के संपर्क में रहीं और उसके आर्थिक तथा आपराधिक नेटवर्क की गहराई से पड़ताल करती रहीं। इसी दौरान जांच कर्ताओं को यह भी जानकारी मिली कि गिरोह का इस्तेमाल केवल ड्रग तस्करी के लिए नहीं, बल्कि अन्य संगठित अपराधों के लिए भी किया जा रहा था। उसके बाद एजेंसियों की जांच का फोकस जबरन वसूली की ओर बढ़ा। बिश्नोई गिरोह के एक सदस्य ने एक कारोबारी से बड़ी रकम वसूलने की योजना बनाई। इसके लिए एक अंडरकवर अधिकारी और मुखबिर का उपयोग किया गया।

हथियारों की तस्करी का भी खुलासा
एजेंसियों की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था। नवंबर 2024 से 2025 के बीच एजेंसियों ने ऐसे कई सौदों का रिकॉर्ड पर लिया जिनमें पिस्तौल, सेमी-ऑटोमैटिक राइफल, एके-47 और ग्रेनेड बेचने की पेशकश की गई थी। अंडरकवर एजेंटों को हथियार खरीदने के लिए प्रेरित किया और कई बैठकों में हथियारों की कीमत, आपूर्ति और डिलीवरी की योजना पर विस्तार से बातचीत हुई।

नकली कोकीन की खेप से बिछाया जाल
फरवरी 2025 में भगवानपुरिया गिरोह ने लगभग 20 किलोग्राम कोकीन की एक खेप बेचने का प्रयास किया। हालांकि, जांच एजेंसियों ने पहले से पूरी रणनीति तैयार कर रखी थी। अंडरकवर ऑपरेशन के तहत नकली खेप का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरे नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और संबंधित लोगों की पहचान सुनिश्चित हो सके। इस कार्रवाई के दौरान कई अहम सबूत मिले, जिनके आधार पर बाद में अभियोग तैयार किए गए।

लॉरेंस, जग्गू के गुर्गाें पर शिकंजा कसने में मिलेगी मदद
अपराध मामलों के जानकार प्रोफेसर सुरेश देसवाल कहते हैं कि अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की कार्रवाई का भारत में लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के गुर्गों पर शिकंजा कसने में मदद मिलेगी। एफबीआई की जांच में जिन लोगों, फोन नंबरों, बैंक खातों, सोशल मीडिया अकाउंट्स और संपर्कों का जिक्र है, उनकी जानकारी भारतीय एजेंसियों के साथ साझा की जा सकती है। इससे भारत में सक्रिय गुर्गों की पहचान और निगरानी आसान होगी। ऑपरेशन हार्ड बॉल का सबसे बड़ा असर यह होगा कि बिश्नोई और भगवानपुरिया नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा। विदेशों में उनकी गतिविधियां सीमित हो सकती हैं। साथ ही भारत में सक्रिय सहयोगियों की पहचान व वित्तीय नेटवर्क की जांच तेज हो सकती है।
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