फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब विधानसभा चुनाव: विकास की कसौटी पर होगी आप की परीक्षा, इन मुद्दों पर विपक्ष बनाएगी माहौल

Tue, 01 Sep 2026 07:01 AM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

साल 1977 से 2022 तक पंजाब के विधानसभा चुनाव के दौरान मुद्दे बहुत अहम रहे हैं। प्रभावशाली मुद्दों ने सरकारें गिराई भी और बनाई भी।
Register For Event
विज्ञापन
पंजाब में चुनावी ट्रेंड - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी दल इन दिनों मुद्दों की जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। राजनीतिक दलों की विशेष समितियां इसी काम में जुटी हैं। अबकी बार नशा, अपराध, भ्रष्टाचार, वित्तीय कुप्रबंधन और वादाखिलाफी जैसे मुद्दों का शोर और माहौल ज्यादा सुनने व देखने को मिलेगा। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के मुद्दों का आधार उनके पांच साल के विकास कार्य बनेंगे। 

विज्ञापन


पंजाब की राजनीति में मुद्दे अहम 
इसी पर आधारित मान सरकार का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है। साल 1977 से 2022 तक पंजाब के विधानसभा चुनाव के दौरान मुद्दे बहुत अहम रहे हैं। प्रभावशाली मुद्दों ने सरकारें गिराई भी और बनाई भी। वे मुद्दे ही थे, जिन्होंने साल 2022 में पहली बार आम आदमी पार्टी को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाया।

कांग्रेस कानून-व्यवस्था व गैंगस्टर कल्चर, नशा तस्करी, वित्तीय कुप्रबंधन और बढ़ता कर्ज, बेरोजगारी और युवाओं का पलायन व किसान और कृषि संकट सरीखे मुद्दों की फेहरिस्त तैयार कर रही है। शिअद (बादल) अपने पारंपरिक सिख व पंथक जनाधार को वापस पाने और राज्य के बुनियादी विकास की वापसी के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। यह दल बंदी सिखों की रिहाई, बेअदबी के मामलों में न्याय, पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल के विकास मॉडल का प्रचार जैसे मुद्दों पर फोकस कर रहा है।
विज्ञापन


उधर शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) असली और पारदर्शी अकाली दल का विकल्प देने के साथ-साथ मूल पंथक सिद्धांतों की बहाली और गठबंधन की राजनीति पर ज्यादा जोर दे रहा है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) नशे पर श्वेत पत्र लाने व पंथक और सिख पहचान जैसे मुद्दों को उछाल रहा है। दूसरी ओर, भाजपा कानून-व्यवस्था, वादाखिलाफी, नशे और गैंगस्टरवाद पर कार्रवाई, डबल इंजन सरकार, औद्योगिक निवेश, रोजगार, किसानों की समस्याएं के समाधान इत्यादि मुद्दों को को आगे रखने की तैयारी कर रही है।

सत्ता पर काबिज आप मुफ्त बिजली, शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं, सरकारी नौकरियों, मोहल्ला क्लीनिक, विकास कार्य और कल्याणकारी योजनाओं को उपलब्धि के रूप में पेश करेगी। नशे, रोजगार, कानून-व्यवस्था और पंजाब के कर्ज पर विपक्ष के आरोपों का जवाब भी देगी।

विज्ञापन

राजधानी-पानी और आतंकवाद भी रहे बड़े मुद्दे
- 1977 में आपातकाल का विरोध, लोकतंत्र की बहाली, पंजाब के अधिकार, चंडीगढ़ पंजाब को दिया जाए, नदियों का जल व पंजाबी भाषी क्षेत्र के मुद्दों ने शिअद-जनता पार्टी के सरकार बनाने का मौका दिया।

- 1980 में अकाली शासन की आलोचना, कानून-व्यवस्था, केंद्र के साथ संबंध, विकास और राजनीतिक स्थिरता इत्यादि मुद्दे कांग्रेस को सत्ता में लाए।
- 1985 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद सिख भावनाएं, पंजाब समझौता, चंडीगढ़, नदियों का जल, शांति और सामान्य स्थिति की बहाली इत्यादि मुद्दों ने शिअद ने फिर सत्ता दिलवाई।

- 1992 में आतंकवाद का खात्मा, कानून-व्यवस्था, लोकतंत्र की बहाली, सामान्य जनजीवन और विकास आदि मुद्दों के दम पर कांग्रेस सरकार आई और बेअंत सीएम बने।

- 1997 में सत्ता विरोधी लहर, आतंकवाद के बाद स्थिरता, कृषि और किसान, बिजली-पानी, बेरोजगारी, विकास, भ्रष्टाचार और क्षेत्रीय स्वाभिमान बड़ा मुद्दे बने। शिअद-भाजपा की गठबंधन सरकार आई।

- 2002 में सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप, बेरोजगारी, किसानों की आर्थिक स्थिति, बिजली-पानी, कानून-व्यवस्था और शासन में बदलाव सरीखे मुद्दों के बूते कांग्रेस फिर सत्ता में काबिज हुई।

- 2007 में सत्ता विरोधी रुख, किसानों की समस्याएं, बिजली, कृषि, बेरोजगारी, औद्योगिक विकास, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और एसवाईएल/पंजाब के पानी का मुद्दा छाया। शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार फिर लौटी।

- 2012 में सरकार के विकास पर लगी मुहर, पहली बार लगातार शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार रिपीट हुई।

- 2017 में नशा, बेअदबी व बरगाड़ी घटनाएं, किसान कर्ज, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, सत्ता विरोधी लहर ने 10 साल की बादल सरकार गिरा दी। कांग्रेस को मौका मिला।

- 2022 में बदलाव की मांग, बेरोजगारी, नशा, भ्रष्टाचार, किसान मुद्दे, बेअदबी, महंगाई, बिजली-पानी व दिल्ली मॉडल पहली बार आप को सत्ता में लाया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें