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पंजाब में ई-चालान को चुनौती दे सकेंगे चालक: करने होंगे साक्ष्य प्रस्तुत, क्या बोले परिवहन मंत्री चीमा?

Wed, 22 Jul 2026 09:01 PM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

पंजाब में अगर ई-चालान गलत तरीके से जारी किया गया है तो नागरिक 45 दिनों के भीतर इसे चुनौती दे सकता है। इसकी जानकारी परिवहन मंत्री चीमा ने दी।  
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पंजाब के परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ई-चालान संबंधी विवादों के जल्द निपटान के लिए पंजाब के सभी जिलों में जिला शिकायत निवारण सेल स्थापित किए जा रहे हैं। यदि किसी नागरिक को लगता है कि उसका ई-चालान गलत तरीके से जारी किया गया है, तो वह 45 दिनों के भीतर इसे चुनौती दे सकता है। वाहन स्वामी अपने दावे के समर्थन में डैशकैम फुटेज, फोटो, वीडियो क्लिप, गवाहों के बयान व अन्य आवश्यक साक्ष्य जिला शिकायत निवारण सेल के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
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परिवहन मंत्री चीमा ने की घोषणा 
यह घोषणा पंजाब के वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने की। मंत्री ने बताया कि नए दिशा-निर्देशों के तहत जहां नागरिकों को गलत ई-चालानों को चुनौती देने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। वहीं, खतरनाक ड्राइविंग, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा वाहन संबंधी रिकॉर्ड समय पर अपडेट न करने पर भी सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।

वाहन पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड को अपडेट रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए चीमा ने कहा कि वाहन स्वामियों द्वारा स्वामित्व व पते में परिवर्तन की जानकारी समय पर दर्ज न कराने पर अब सख्त जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार पता बदलने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर पंजीकरण प्राधिकरण को सूचित करना अनिवार्य है।
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परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खतरनाक ड्राइविंग को आधिकारिक रूप से गैर-समझौता योग्य (नॉन-कंपाउंडेबल) अपराध घोषित कर दिया है। ऐसे मामलों का निपटारा मौके पर केवल जुर्माना भरकर नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के अंतर्गत आने वाले अपराध, जैसे लालबत्ती पार करना, स्टॉप साइन की अनदेखी करना, यातायात की निर्धारित दिशा के विपरीत वाहन चलाना व शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना, अब सख्त कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।

मंत्री के अनुसार, ऐसे मामलों में किसी प्रकार की रियायत या समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होगी। उन्होंने कहा, यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए अपराध करता है तो उसके माता-पिता, अभिभावक अथवा वाहन मालिक को उत्तरदायी माना जाएगा। ऐसे मामलों में भारी जुर्माना लगाया जाएगा, वाहन का पंजीकरण तत्काल निरस्त किया जा सकता है। संबंधित नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा।

सड़क अनुशासन को मजबूत बनाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इन नई अधिसूचित व्यवस्थाओं का उद्देश्य पूरे राज्य में यातायात कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे सड़क पर चलते समय यातायात नियमों और कानूनी प्रावधानों का पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से पालन करें।
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