फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब में पराली जलाने पर सख्ती: 125 ड्रोन आसमान से रखेंगे नजर, खेतों में उतरेगी प्रोटेक्शन फोर्स

Sun, 04 Oct 2026 02:10 PM IST
शाहिल शर्मा रिंपी गुप्ता, पटियाला

सार

खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार पंजाब सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इसके लिए राज्य में 12 हजार अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, तकनीक के साथ 1200 सदस्यीय पराली प्रोटेक्शन फोर्स को खेतों में उतारने की तैयारी है। डिटेल में पढ़ें खबर...
Register For Event
विज्ञापन
पंजाब में पराली जलाने पर पहरा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब सरकार ने 2026 के लिए पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की है। इस योजना में आसमान से लेकर जमीन तक कड़ी निगरानी और खेतों में आग लगने पर त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया गया है। इसके तहत राज्य में पहली बार 125 ड्रोन तैनात किए जाएंगे।

विज्ञापन


आग लगने की घटनाओं को रोकने और तुरंत कार्रवाई के लिए 12000 नोडल अधिकारी तथा 1200 सदस्यीय पराली प्रोटेक्शन फोर्स भी मैदान में उतरेगी। छह जिलों संगरूर, तरनतारन, मोगा, फिरोजपुर, मुक्तसर और मानसा के 23 गांवों को हॉटस्पॉट के तौर पर चिह्नित किया गया है। इन गांवों में 2025 में दस से अधिक आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं।

कार्य योजना के अनुसार, 125 ड्रोनों में से एक-एक ड्रोन इन 23 हॉटस्पॉट गांवों में तैनात होगा। 2025 में जिन गांवों में पांच से नौ आग के मामले सामने आए थे, उनमें से हर तीन गांवों के लिए एक ड्रोन लगाया जाएगा। बाकी ड्रोन जरूरत के हिसाब से विभिन्न जिलों में तैनात होंगे। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि ड्रोन आ गए हैं और जल्द ही निगरानी में लगाए जाएंगे। ड्रोन से निगरानी विशेष रूप से दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे के बीच की जाएगी, क्योंकि इस समय देर शाम या रात को पराली जलाई जाती है।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

500 नए कस्टम हायरिंग सेंटर बनेंगे 
2026 में धान का रकबा करीब 30 लाख हेक्टेयर है और पराली उत्पादन 188.1 लाख टन रहने का अनुमान है, जो 2025 के 193.2 लाख टन से करीब 5.1 लाख टन कम होगा। 2026 के लिए इन-सिटू प्रबंधन का लक्ष्य 101.5 लाख टन और एक्स-सिटू का लक्ष्य 78 लाख टन रखा गया है। सरकार 2026 में 15 हजार अतिरिक्त सीआरएम यूनिट उपलब्ध कराएगी और 500 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करेगी। हॉटस्पॉट जिलों और गांवों को मशीन उपलब्ध कराने में प्राथमिकता दी जाएगी। मशीनों की डिजिटल मैपिंग भी की जाएगी।

लंबी अवधि वाली धान की किस्मों पर रोक
कार्य योजना में एक्स-सिटू प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया है, जिसका लक्ष्य 2026 में 78 लाख टन पराली का उपयोग करना है। औद्योगिक बॉयलरों में अकेले करीब 45 लाख टन पराली खपत का लक्ष्य है। राज्य में 74 औद्योगिक इकाइयां पहले से पराली को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। पंजाब में पराली आधारित 57 सीबीजी परियोजनाएं आवंटित हैं, जिनमें से छह चालू हैं। पांच और परियोजनाएं 2026-27 में शुरू होंगी। सरकार ने पूसा-44 जैसी लंबी अवधि वाली धान की किस्मों पर रोक लगाई है और पीआर-126 जैसी कम अवधि वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा। धान का रकबा कम करने के लिए मक्का, कपास और गन्ने की ओर 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को विविधीकृत करने की योजना है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें