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पंजाब में कमल खिलाना बड़ी चुनौती: नई टीम, नाराजगी, अनुभव और जोश में बिठाना होगा समन्वय, गठबंधन पर क्लाइमेक्स

Tue, 25 Aug 2026 07:00 AM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

हाल ही में हाईकमान ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए पंजाब भाजपा की कमान मालवा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले जट सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों को सौंपी है। सूबे की राजनीति में मालवा की लहर ही सत्ता का रुख तय करती है। 
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पंजाब में भाजपा का मिशन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी सूबे में अपनी नई संगठनात्मक टीम के साथ मैदान में है। पुराने नेताओं के अनुभव और नई टीम के जोश के बीच समन्वय स्थापित कर भाजपा नई रणनीति और नए समीकरणों के साथ पंजाब में कमल खिलाने की कवायद में जुटी है। नई टीम में हाशिये पर पहुंचे कुछ टकसाली नेताओं में थोड़ी नाराजगी है। शिअद के साथ गठबंधन की चर्चाएं भी जारी हैं। 

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इसके बावजूद भाजपा मिशन 2027 के लिए आगे बढ़ रही है। हाल ही में हाईकमान ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए पंजाब भाजपा की कमान मालवा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले जट सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों को सौंपी है। सूबे की राजनीति में मालवा की लहर ही सत्ता का रुख तय करती है। ढिल्लों पहले कांग्रेस के विधायक थे और साल 2022 के बाद भाजपाई बने। उन्होंने अपनी नई टीम बनाई तो उसमें अपेक्षित स्थान न मिलने की वजह से कुछ टकसाली नेता (भाजपा के पुराने कैडर के नेता) नाराज हो गए।

इन दिनों हाईकमान इन नाराज नेताओं की नाराजगी दूर करने में जुटा है। उधर कुछ दिन पहले ही प्रभारी सतीश पूनिया को हाईकमान ने पंजाब भाजपा का प्रभारी लगाया है। पूनिया हरियाणा के प्रभारी भी हैं और पार्टी के बड़े चुनावी रणनीतिकारों में से एक माने जाते हैं। 

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केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल को चुनावी प्रभारी की जिम्मेदारी देने की तैयारी है। पाटिल पिछले पंद्रह दिनों से दिल्ली में पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं संग बैठकें कर रहे हैं। फिलहाल पूनिया और पाटिल का फोकस भी अपने सियासी विरोधियों से दो-दो हाथ करने से पूर्व पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने पर है।

गठबंधन की अटकलें कायम
पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच चुनाव से पूर्व गठबंधन की अटकलें अभी तक कायम हैं। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता गठबंधन के रास्ते खुले बताते हैं तो कुछ नेता अपने दम पर सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कहते हैं। पिछले दिनों शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की पीएम नरेंद्र मोदी संग बैठक और लोगोंवाल में शिअद की सांसद हरसिमरत कौर बादल का दबी जुबान में दिल्ली वालों संग गठजोड़ का इशारा इन अटकलों को बल देता है मगर राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष सभी सीटों पर खुद लड़ने की बात कहते हैं। फिलहाल चर्चाओं का दौर जारी है।

सीएम सैनी की सक्रियता के मायने
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पंजाब में बढ़ती सक्रियता को विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। सैनी भाजपा के ओबीसी चेहरे हैं और पंजाब में गैर-जाट, विशेषकर सैनी व अन्य पिछड़ी जातियों के बीच पार्टी की पैठ बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में करीब 20-25 सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां ओबीसी और गैर- जाट पिछड़ी जातियों का चुनावी प्रभाव निर्णायक हो सकता है। इसी के चलते भाजपा सीएम सैनी को हरियाणा के विकास मॉडल के साथ हिंदू-पंजाबी व ओबीसी सामाजिक समीकरण के व्यापक चेहरे के तौर पर भी इस्तेमाल कर रही है।
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