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प्रबल हत्याकांड: बचाव पक्ष की दलीलें अदालत में नहीं टिकीं फैसले में एक-एक तर्क का दिया जवाब; ये नजीर बनी आधार

Sat, 01 Aug 2026 10:08 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर

सार

19 दिसंबर की रात बिजनौर के प्रबल की हत्या हुई और 15 जनवरी 2013 को उसका शव मिला। 26 जुलाई 2013 को पुलिस ने कोर्ट में इस केस में आरोपपत्र दाखिल किया। 14 वर्षों तक चली इस इंसाफ की लड़ाई में 352 तारीख लगीं। इसके बाद प्रबल की बहन प्राची के लिए शुक्रवार को इंसाफ की घड़ी आ ही गई।
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Prabal Agarwal Murder Case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
बिजनौर के प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान कई अहम दलीलें रखीं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया। फैसले में न्यायालय ने बचाव पक्ष के प्रत्येक प्रमुख तर्क पर विस्तार से अपनी टिप्पणी दर्ज की है।

बचाव पक्ष का पहला तर्क था कि पोस्टमार्टम होने मात्र से यह सिद्ध नहीं होता कि बरामद शव प्रबल अग्रवाल का ही था। इस पर अदालत ने कहा कि गवाह अरविंद कुमार ने बताया कि 15 जनवरी 2013 को गंगा किनारे मिले शव की जेब से मोबाइल फोन मिला था।

उसी मोबाइल से मृतक की बहन को सूचना दी गई, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे और शव की पहचान प्रबल अग्रवाल के रूप में की। न्यायालय ने कहा कि इन तथ्यों के बाद यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि पोस्टमार्टम किसी अन्य व्यक्ति के शव का हुआ था।
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प्रबल अग्रवाल की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि विवेचना के दौरान जिन गवाहों ने पुलिस को बयान दिए थे, उनमें से कुछ न्यायालय में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। अदालत ने कहा कि किसी गवाह के पक्षद्रोही हो जाने मात्र से पूरा अभियोजन असत्य नहीं हो जाता। यदि अन्य विश्वसनीय साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं तो ऐसे गवाहों के मुकरने का लाभ आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि अन्य गवाहों की गवाही, बरामदगी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
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सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते हुए विनय अग्रवाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत बोली- खराब विवेचना से दोषियों को नहीं मिल सकता लाभ
प्रबल हत्याकांड में सातों आरोपियों को दोषी ठहराते समय अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस विवेचना में कमियां होने मात्र से आरोपी बरी नहीं हो सकते। अदालत ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि अभियोजन के साक्ष्य अपराध सिद्ध करते हैं तो विवेचना की खामियों का लाभ आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। 

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सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते हुए अपूर्व - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
निर्णय में अदालत ने हरेंद्रा राय बनाम बनाम बिहार राज्य आपराधिक अपील संख्या-1726/2015 (निर्णय दिनांक 18 अगस्त 2023) के कई पैरा का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि कई मामलों में जांच अधिकारी लापरवाही करते हैं या महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र नहीं करते, लेकिन ऐसी चूक का पुरस्कार आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। यदि ऐसा किया गया तो न्याय व्यवस्था और आम लोगों का विश्वास दोनों प्रभावित होंगे। 
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सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते हुए राहुल गुप्ता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने प्रबल हत्याकांड के सभी दोषियों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 364 (अपहरण), 147 (दंगा करने), 201 (साक्ष्य मिठाने) में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक धारा के तहत अलग-अलग सजा निर्धारित की, जो नियमानुसार साथ-साथ चलेगी। साल 2012 में हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड में इंसाफ के लिए मृतक के परिजन लगातार पैरवी कर रहे थे।
 
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बिजनौर में भाई प्रबल की हत्या करने वाले दोषियों को आजीवन कारावास की सजा होने पर बिलख पड़ी बहन प्राच - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महिला आयोग की सदस्य के पति-बेटे समेत 7 को उम्रकैद
बिजनौर में 14 साल पहले अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान हुए प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महिला आयोग की सदस्य के पति और पुत्र समेत सात अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी पर 1.25 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। समारोह में एक युवती से बात करने के आरोप में प्रबल की पीट-पीट कर हत्या करने के बाद शव गंगा में फेंक दिया था।
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बिजनौर में प्रबल हत्या में आजीवन कारावास की सजा होने के बाद हंगामा करती अपूर्व अग्रवाल की पत्नी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्ष 2012 में हुई प्रबल की हत्या में सजा पाने वालों में महिला आयोग की सदस्य एवं भाजपा नेता संगीता अग्रवाल के पति विनय अग्रवाल और पुत्र अपूर्व अग्रवाल शामिल हैं। अर्थदंड की धनराशि में 90 फीसदी रकम प्रबल की बहन को दी जाएगी। आलोक अग्रवाल ने शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 19 दिसंबर 2012 की रात आठ बजे बिजनौर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में अग्रसेन जयंती समारोह में उनका बेटा प्रबल अग्रवाल शहर के ही आशीष और सचिन के साथ गया था।

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बिजनौर में प्रबल हत्या में फैसला आने के बाद जमा भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहां युवती से बात करने का आरोप लगाते हुए उसे पीटा गया। आरोपी शराब के नशे में थे। वे प्रबल को पीटते हुए कहीं ले गए और हत्या कर दी। शव गंगा में फेंक दिया गया था। 15 जनवरी 2013 को प्रबल का शव हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में मिला था।

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बिजनौर में प्रबल हत्या में फैसला आने के बाद जमा भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने 18 मई 2013 को आरोप पत्र दाखिल किया। आशु के खिलाफ बाद में दूसरा आरोप पत्र दाखिल हुआ। बुधवार को दोष सिद्ध हुआ और शुक्रवार को सातों अभियुक्तों को अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजाद अली ने उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी आरोपी हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे थे। 

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बिजनौर में जजी चौक पर प्रबल के शव विलाप करते बहन प्राची व अन्य(फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कमजोर विवेचना पर पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि केस को कमजोर करने के लिए पुलिस ने सही तरीके से विवेचना नहीं की। इसके चलते अदालत ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक सिटी, क्षेत्राधिकारी और तीन विवेचकों के खिलाफ विभागीय जांच, कानूनी कार्रवाई करने तथा उक्त कार्रवाई से अदालत को छह महीने के अंदर अवगत कराने के आदेश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं।
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बिजनौर में प्रबल को श्रद्घांजलि देते शहरवासी(फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन्हें हुई सजा
विनय अग्रवाल- महिला आयोग की सदस्य संगीता अग्रवाल का पति है और इलेक्ट्रिक स्कूटी का शोरूम, पता- कृष्ण प्लाजा मार्केट। 
अपूर्व अग्रवाल-संगीता अग्रवाल का बेटा है और ज्वैलरी की दुकान, पता-कृष्ण प्लाजा मार्केट।
संजय गुप्ता- रामलीला सेवा समिति का संरक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता, पता-मोहल्ला बाजार संभा 
राहुल गुप्ता-लोहा सरिया, सीमेंट कारोबारी, पता-मोहल्ला खत्रियान। 
अनुज गुप्ता-घनश्याम गुप्ता चक्की वालों का बेटा, निजी कंपनी में जॉब, पता-नई बस्ती बिजनौर
निखिल अग्रवाल-नमकीन फैक्टरी का संचालक, पता-मोहल्ला जाटान 
आशीष अग्रवाल-कपड़ा व्यापारी, पता-मोहल्ला जाटान
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