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आजम खां का सपा में जलवा बरकरार: गठबंधन दरकिनार, 50 फीसदी मुस्लिमों को हिस्सेदारी देकर अहसान चुकाने का प्रयास

Thu, 09 Jun 2022 01:11 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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आजम खां, अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
सपा में आजम खां का जलवा बरकरार है। राज्यसभा के बाद विधान परिषद सदस्यों के चयन में भी उनका पलड़ा भारी दिखा। उनके लिए पार्टी हाईकमान ने गठबंधन को भी दरकिनार करने में गुरेज नहीं किया। एमएलसी चुनाव में 50 फीसदी हिस्सेदारी मुस्लिमों को दी है। इसके जरिए विधानसभा चुनाव के दौरान दिखाई गई एकजुटता का अहसान चुकाया गया है और यह संदेश भी दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय का हित सपा के साथ है।

सपा ने रालोद के जयंत चौधरी, कपिल सिब्बल और जावेद अली को राज्यसभा भेजा है। कपिल सिब्बल का नाम आजम खां की पैरवी को लेकर जोड़ा जा रहा है तो जावेद अली को अल्पसंख्यक समुदाय की नुमाइंदगी के तौर पर देखा जा रहा है। विधान परिषद सदस्यों के चयन को लेकर कई चरणों में मंथन चला। चार सदस्यों में सबसे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम तय हुआ।

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विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन करते स्वामी प्रसाद मौर्य। - फोटो : amar ujala
फाजिल नगर से विधानसभा चुनाव हारने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के जरिए पिछड़े वर्ग को साधा गया है। क्योंकि कई चहेतों को टिकट दिलवाने में असफल होने पर स्वामी प्रसाद मौर्य नाराज थे। वहीं, यह संदेश देने की कोशिश है कि पार्टी में पिछड़ों के हितों की अनदेखी नहीं होगी। दूसरे उम्मीदवार करहल से पूर्व विधायक सोबरन सिंह के बेटे मुकुल यादव हैं। अन्य दोनों उम्मीदवारों के नामों पर कई दिनों तक मशक्कत चली।
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आजम खां, अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
सियासी जानकारों का कहना है कि सहारनपुर के शाहनवाज खां और सीतापुर के जासमीर अंसारी को एमएलसी उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे गए हैं। अल्पसंख्यकों को 50 फीसदी हिस्सेदारी देकर भविष्य की एकजुटता बनाए रखने का संदेश दिया है तो एक खान और दूसरे अंसारी समुदाय के जरिए उनके बीच उठने वाले अगड़े व पिछड़े की खाई भी पाटी गई है। आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में अंसारी समुदाय की बहुलता का भी ध्यान रखा गया है। अहम बात यह है कि यह दोनों आजम खां के खासमखास हैं। शाहनवाज के पिता सरफराज खां पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और आजम खां से उनकी दोस्ती जग जाहिर है। पूर्व विधायक जासमीर अंसारी ने आजम खां की सीतापुर जेल में रहने के दौरान सहयोग किया था।

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अब्दुल्ला आजम। - फोटो : amar ujala
पहली बार चमका अब्दुल्ला का चेहरा
दूसरी बार विधायक चुने गए अब्दुल्ला आजम का चेहरा पहली बार चमकता हुआ नजर आया। वह शपथ ग्रहण करने के बाद अखिलेश से मिले थे और बुधवार सुबह पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां से अखिलेश के साथ विधानसभा पहुंचे और नामांकन के वक्त सपा अध्यक्ष के बगल वाली कुर्सी पर बैठे। वहीं, अन्य विधायक खड़े रहे। ऐसे में संदेश साफ है कि आजम खां की सियासत को अब्दुल्ला आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं।
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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर - फोटो : amar ujala
अधूरी रही गठबंधन दलों की हसरत
सपा गठबंधन में शामिल सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर के बेटे का नाम एमएलसी के लिए सुर्खियों में रहा। उन्होंने निरंतर प्रयास किया लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने सीटें कम होने का हवाला देकर दरकिनार कर दिया। इसी तरह महान दल और राष्ट्रीय जनवादी पार्टी को भी कोई सीट नहीं दी। ऐसे में सुभासपा ने ट्विटर पर नाराजगी जताई है तो महान दल ने गठबंधन तोड़ लिया है।
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