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Parenting Tips: बच्चे की जिद और गुस्से की वजह क्या है? कहीं ये गलतियां तो नहीं कर रहे अभिभावक

Wed, 28 Jan 2026 12:29 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Smart Parenting Hacks:  बच्चों का गुस्सा दुश्मन नहीं, संदेशवाहक है। उन्हें कंट्रोल नहीं, कनेक्शन चाहिए। सख्ती नहीं, सुरक्षा चाहिए। जो माता-पिता सुनना सीख लेते हैं, उनके बच्चे चिल्लाना छोड़ देते हैं।
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बच्चे के गुस्से को कैसे कम करें - फोटो : Adobe stock

बच्चे जब गुस्सा करते हैं तो उनके व्यवहार को लोग या तो इग्नोर कर देते हैं या ये समझने लगते हैं कि बच्चे की संगत खराब है या वह बिगड़ रहा है। हालांकि गुस्सा इस बात का संकेत भी हो सकता है कि वह कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन शब्द नहीं मिल रहे। आज की व्यस्त जीवनशैली, दिनभर स्क्रीन पर बिताए वक्त और तुलना प्रधान दौर में बच्चों के नखरे बढ़ गए हैं। ऐसे में जब बच्चे को डांट पड़ती है तो वह चुपतो हो जाता है लेकिन उसका मस्तिष्क बहुत कुछ सोचने लगता है। यही विचार उनके अंदर चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ाते हैं। 

डांट बच्चों को चुप तो कर सकती है, पर शांत और संतुष्ट नहीं। बच्चे समझ से संभलते हैं। अगर हर छोटी बात पर रोना, जिद, चिल्लाना या चीजें फेंकना आपके बच्चे का रोज का ड्रामा बन गया है, तो अपनी परवरिश में आपको कुछ बदलाव लाने की जरूरत है। स्मार्ट तरीके अपनाकर आप बच्चे के गुस्से और नखरे कम कर सकते हैं।

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बच्चा गुस्सा क्यों करता है - फोटो : adobe

बच्चे गुस्सा क्यों करते हैं?

  • जब भावनाएं शब्दों से बड़ी हो जाती हैं

  • थकान, भूख या नींद की कमी

  • जरूरत से ज़्यादा स्क्रीन टाइम

  • तुलना या बार-बार टोकना

  • माता-पिता का गुस्सा और जल्दबाज़ी

याद रखें, बच्चे वही सीखते हैं, जो देखते हैं।

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गु्स्सैल बच्चों को संभालने के टिप्स - फोटो : Istock

बच्चों का गुस्सा संभालने के 10 स्मार्ट हैक्स


गुस्से में डांट नहीं, दूरी रखें

जब बच्चा गुस्से में हो, तब समझाना बेकार जाता है। गुस्से में उसे डांटेंगे तो उसके अंदर की विरोधी भावना अधिक विद्रोही होगी। इसलिए पहले उसे शांत होने दें, फिर बात करें।


भावनाओं को नाम देना सिखाएं

बच्चे से कहें, “लग रहा है तुम नाराज हो” या “तुम उदास हो”। इससे बच्चा खुद को समझा हुआ महसूस करता है। जब उसे अपनी भावनाएं समझ आती हैं, तो वह उनके कारणों को सभी स्पष्ट व्यक्त कर पाता है।

 

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बच्चे को कैसे समझाएं - फोटो : Adobe stock

‘ना’ को विकल्प के साथ रखें

बच्चे को जब माता-पिता सीधे मना कर देते हैं, तो उसमें गुस्से की भावना बढ़ती है। सीधा मना करने के बजाय उससे कहें, “ऐसा मत करो” या  "अभी नहीं, लेकिन थोड़ी देर में कर सकते हैं।" इससे बच्चे को बुरा भी नहीं लगता।


 स्क्रीन टाइम पर सीमा ज़रूरी

अत्यधिक मोबाइल और टीवी बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ाता है। बच्चे को टीवी देखने दें लेकिन दिन में तय समय और कंटेंट दोनों पर नजर रखें।

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बच्चे के गुस्से को कैसे कम करें - फोटो : Adobe stock

रोज का रूटीन बनाएं

सोने-जागने, खाने और खेलने का समय तय करें। रूटीन तय होने से बच्चों को सुरक्षा और स्थिरता मिलती है।


गुस्से को निकालने का रास्ता दें

गुस्सा दबाने से नहीं, निकालने से शांत होता है।

  • ड्राइंग
  • तकिया पीटना
  • दौड़ना या कूदना
     
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जिद और नखरे को कैसे दूर करें - फोटो : Adobe stock

तुलना से बचें

“देखो वो बच्चा कितना अच्छा है” यह लाइन बच्चे के आत्मविश्वास को तोड़ देती है। अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें। 


आप खुद शांत रहें

आपका रिएक्शन ही बच्चे की दिशा तय करता है। अगर माता पिता शांत और सुलझे हुआ बर्ताव करते हैं तो बच्चा भी सुरक्षित बचपन जीता है। 

 

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parenting tips - फोटो : Adobe stock

 पॉजिटिव बिहेवियर को सराहें

जब बच्चा अच्छा व्यवहार करे, तो उसकी सराहना करें। उससे कहें, “मुझे अच्छा लगा तुमने शांति से बात की।”


 प्यार और समय

दिन में 15–20 मिनट बिना मोबाइल के सिर्फ बच्चे के साथ बिताएं। यही सबसे असरदार थेरेपी है।


कब सतर्क होना जरूरी है?

अगर बच्चा, 

  • लगातार हिंसक हो

  • खुद को नुकसान पहुंचाए

  • बहुत ज़्यादा चुप रहने लगे

तो बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना बिल्कुल ठीक है।

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