Kidney Health Care: कुछ परेशानियां ऐसी होती हैं, जो बार-बार होने पर ये संकेत देती है कि आगे चलकर आपकी किडनी खराब हो सकती है। आइए इन्हीं दिक्कतों के बारे में आपको बताते हैं।
Kidney Health Care: किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के साथ-साथ शरीर में मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाती है। समस्या यह है कि किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नहीं देतीं।
इसलिए अगर नीचे लेख में दी गई कुछ समस्याएं लंबे समय से है या बार-बार सामने आ रही है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच से किडनी की समस्या का पता लगाकर उसके बढ़ने की रफ्तार को कम किया जा सकता है।
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किडनी की बीमारी के संकेत
- फोटो : Freepik.com
किन परेशानियों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
1. बार-बार पेशाब आना या पेशाब के पैटर्न में बदलाव
सामान्य से अधिक या कम पेशाब आना कई कारणों से हो सकता है। लेकिन अगर यह लगातार बना रहे, खासकर रात में बार-बार पेशाब आए, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है।
2. पेशाब में झाग दिखाई देना
लगातार झागदार पेशाब यूरिन में प्रोटीन आने का संकेत हो सकता है। इसे बार-बार देखने पर यूरिन टेस्ट के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
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किडनी की बीमारी के संकेत
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3. पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
जब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक को पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में फ्लूइड जमा होने से सूजन हो सकती है।
4. लगातार थकान और कमजोरी
किडनी की बीमारी बढ़ने पर थकान, कम ऊर्जा और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
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किडनी की बीमारी के संकेत
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5. भूख कम लगना, जी मिचलाना
एडवांस्ड किडनी डिजीज में भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण लगातार रहें तो चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
6. त्वचा में खुजली या रूखापन
किडनी की कार्यक्षमता काफी कम होने पर त्वचा में खुजली और रूखापन जैसी समस्या देखी जा सकती है।
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किडनी की बीमारी के संकेत
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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मोटापा, परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास, उम्र बढ़ना जैसे कारण CKD के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
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किडनी की बीमारी के संकेत
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किडनी की जांच कैसे होती है?
किडनी की सेहत का आकलन करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर eGFR वाला ब्लड टेस्ट और uACR यूरिन टेस्ट जैसी जांचों का इस्तेमाल कर सकते हैं। eGFR किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अंदाजा देता है, जबकि uACR यूरिन में एल्ब्यूमिन/प्रोटीन की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करता है।
इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में किडनी की बीमारी साबित नहीं करता। लेकिन लक्षण बार-बार हों, लंबे समय तक बने रहें या साथ में डायबिटीज/हाई BP जैसे जोखिम कारक हों, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में अक्सर बिना लक्षण के होती है, इसलिए जोखिम वाले लोगों में नियमित जांच महत्वपूर्ण है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।