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लद्दाख में बवाल: तोड़फोड़, आगजनी...पथराव और लाठीचार्ज, क्यों हिंसक हुआ आंदोलन? क्या है छठी अनुसूची; पूरी कहानी

Thu, 25 Sep 2025 09:31 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह

सार

लद्दाख में छठी अनुसूची को लेकर आंदोलन हिंसक हो गया। आगजनी और गोलीबारी में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। 80 घायल हो गए हैं। कर्फ्यू लगा दिया गया है। तोड़फोड़ और पथराव के बीच प्रदर्शनकारियों ने भाजपा प्रदेश कार्यालय भी फूंक दिया। इसके अलावा कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कांग्रेस काउंसलर पर एफआईआर दर्ज की गई है।
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leh ladakh protest - फोटो : पीटीआई
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर 15 दिन से चल रहे अनशन के दौरान बुधवार को अचानक युवाओं का हुजूम उमड़ा और शांतिपूर्ण चल रहे आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। तोड़फोड़, आगजनी और पथराव के बीच गुस्साए युवाओं ने भाजपा का प्रदेश कार्यालय फूंक दिया। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। इस बीच पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। 40 पुलिस कर्मियों व सीआरपीएफ के जवानों समेत करीब 80 लोग घायल हुए हैं।

कांग्रेस नेता और काउंसलर फुटसोग स्टेजिन त्सेपाग पर भड़काऊ भाषण देने के लिए केस दर्ज किया गया है। हालात तनावपूर्ण हैं और प्रशासन ने लेह में कर्फ्यू लगा दिया है। इंटरनेट सेवा बाधित है। इस बीच, हिंसक घटना से आहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है।
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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
सोनम वांगचुक की अगुवाई में 15 लोग 10 सितंबर से 35 दिन के धरने पर बैठे थे। वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा व सांस्कृतिक व सांविधानिक सुरक्षा के लिए छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग कर रहे थे। मंगलवार को लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के दो कार्यकर्ताओं की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 
 
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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
अचानक वहां पहुंच गया युवाओं का हुजूम
इसके बाद एलएबी की यूथ विंग ने बुधवार को लेह बंद का एलान किया था। बुधवार सुबह रोजाना की तरह शहीदी पार्क में धरना शांतिपूर्ण शुरू हुआ लेकिन दोपहर होते-होते अचानक वहां युवाओं का हुजूम पहुंच गया। युवाओं ने 'वी वांट सिक्स्थ शेड्यूल' के नारे लगाते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। 
 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
भाजपा प्रदेश कार्यालय में पथराव के साथ लगाई आग
ये हुजूम पार्क से चला तो सीआरपीएफ ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों ने जवाब में पथराव कर दिया। उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। युवा वहां से भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे। वहां पथराव के साथ उन्होंने आग लगा दी। 

 
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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
सीआरपीएफ के वाहन समेत कुछ अन्य वाहनों को भी फूंके
भाजपा कार्यकर्ता किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागे। इसके बाद युवाओं ने वहां रखे कागजात और फर्नीचर को आग के हवाले कर दिया। उग्र युवाओं ने रास्ते में खड़े सीआरपीएफ के वाहन समेत कुछ अन्य वाहनों को भी फूंक दिया। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद यानी एलएएचडीसी के लेह ऑफिस को भी युवाओं ने निशाना बनाया।
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सोनम वांगचुक - फोटो : पीटीआई
यह युवाओं की क्रांति... पर हिंसा रोकें : वांगचुक
सोनम वांगचुक ने कहा- यह जेन-जी नहीं, युवाओं की क्रांति है। युवा पांच साल से बेरोजगार हैं। लद्दाख के लिए दुख का दिन है। हम शांति के रास्ते पर चल रहे थे। आज हम शांति के पैगाम को नाकाम होते हुए देख रहे हैं। हिंसा, गोलीबारी व आगजनी हो रही है। युवाओं से अपील करता हूं कि बेवकूफी बंद करें। इससे हमारे मकसद को नुकसान पहुंचता है। हम अनशन तोड़ रहे हैं, प्रदर्शन रोक रहे हैं।
 
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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
सोनम के बयानों से भड़की हिंसा: सरकार
केंद्र सरकार ने कहा कि हिंसा सोनम वांगचुक के बयानों के कारण भड़की। गृह मंत्रालय ने कहा, सरकार व लद्दाख के समूहों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, पर राजनीति से प्रेरित कुछ व्यक्ति इससे खुश नहीं हैं। मंत्रालय ने कहा, वांगचुक ने भूख हड़ताल के दौरान अरब स्प्रिंग-शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में जेन-जी के प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख कर लोगों को गुमराह किया।

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
आज लेह और कारगिल बंद
वीरवार को लेह के साथ ही कारगिल भी बंद रहेगा। लद्दाख के हितों के लिए लड़ रहे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए कारगिल बंद का एलान किया गया है। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल के चेयरमैन डॉ. जफर अखून ने इसकी पुष्टि की।
 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
छह को प्रस्तावित है हाई पावर कमेटी की बैठक
लद्दाख मामलों पर गठित हाईपावर कमेटी की बैठक छह अक्तूबर को प्रस्तावित है। इसमें गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों जिनमें एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सदस्य शामिल हैं, को अपनी बात रखने के लिए नई दिल्ली जाना था। सोनम वांगचुक इस बैठक को छह से पहले किए जाने के पक्ष में थे। कई दौर की बातचीत के बावजूद छठी अनुसूची पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है।
 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
क्या है छठी अनुसूची 
संविधान को छठी अनुसूची में फिलहाल त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम शामिल है। यह अनुसूची शासन, राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, स्थानीय निकायों के प्रकार, वैकल्पिक न्यायिक तंत्र और स्वायत्त परिषदों के माध्यम से प्रयोग की जाने वाली वित्तीय शक्तियों के संबंध में विशेष प्रावधान करती है।

 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
ये हैं प्रमुख मांगें
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक सुरक्षा
लेह और कारगिल दो अलग लोकसभा सीटें
सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण
 

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लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता - फोटो : पीटीआई
कांग्रेस ने उकसाया, बाहर से आए लोगों ने हिंसा भड़काने का काम किया : एलजी
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता का कहना है कि स्थिति अपने आप नहीं बिगड़ी। इसे जानबूझकर बिगाड़ा गया। कांग्रेस के नेताओं ने उकसाया तो बाहर से आए लोगों ने हिंसा को भड़काने का काम किया। सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख में अरब स्प्रिंग-शैली के विरोध प्रदर्शन की इच्छा जता रहे हैं। नेपाल में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों का उनका संदर्भ अब एक खाका सा लगता है। क्या उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल अपने निजी मुद्दों को लेकर कुछ अनियमितताओं को छिपाने के लिए किया है जो अब सामने आ रही हैं? 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
कांग्रेस नेताओं ने ऐसे बयान दिए जो लगभग निर्देशों जैसे लग रहे थे। वे इतने तैयार क्यों थे? पूरा घटनाक्रम राजनीति और निजी स्वार्थ से प्रेरित साजिश की ओर इशारा करता है। युवाओं को दोष नहीं दिया जा सकता। उन्हें गुमराह किया गया, राजनीतिक और निजी स्वार्थ के लिए एक भयावह साजिश में फंसाया गया। 

 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
साजिश के तहत बाहर से आकर लोगों ने हिंसा को भड़काने का काम किया है। इसके पीछे जो लोग जिम्मेदार हैं उनकी पहचान की जाएगी। जो लोग लद्दाख की शांति भंग करने आए थे, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। 

 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
उन्होंने कहा, स्थानीय लोगों को इस साजिश को समझना होगा। हम प्रदेश के युवाओं के साथ हैं। प्रशासन ने पर्यटन और शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। रोजगार की अधिसूचना भी निकाली जा रही है। इसके बावजूद कुछ लोग माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। 

 

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Protests in Ladakh - फोटो : पीटीआई
बुधवार को बंद-प्रदर्शन के आह्वान के मद्देनजर पुलिस बल को लाठियों के साथ तैनात किया गया था। एहतियात के तौर पर सीआरपीएफ के जवानों को लगाया गया था। भीड़ ने डीजीपी की गाड़ी पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके जिससे हिंसा बढ़ गई।
 

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला - फोटो : ANI
जम्मू-कश्मीर की आंखें खोलने वाले हैं लेह के हालात : उमर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लेह की स्थिति आंखें खोलने वाली है और बताती है कि पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने पर जम्मू-कश्मीर के लोग कैसा महसूस कर रहे हैं। लद्दाख को तो पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा भी नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, 2019 में लद्दाख के लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश बनने का जश्न मनाया था। 
 
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सीएम उमर अब्दुल्ला - फोटो : ANI
अब विश्वासघात और गुस्सा महसूस कर रहे हैं। उमर ने कहा, प्रदेश में भाजपा की जीत नहीं हुई है तो इसकी सजा जम्मू-कश्मीर के लोगों को नहीं दी जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ने तो यह कभी नहीं कहा था कि भाजपा की सरकार नहीं बनेगी तो प्रदेश की पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा। 
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