राहुल द्रविड़ केवल 'द वॉल' नहीं, भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद नींव रहे हैं। उनकी तकनीक, संयम, मानसिक मजबूती, स्पोर्ट्समैनशिप और कोचिंग ने भारतीय क्रिकेट को अलग ऊंचाई पर पहुंचाया। उनके कई टेस्ट रिकॉर्ड आज भी अटूट हैं और आधुनिक गेम में इनके टूटने की संभावना काफी कम है। उनके विचार जीवन में अनुशासन और धैर्य की सीख देते हैं। भारतीय क्रिकेट इतिहास में द्रविड़ हमेशा एक सम्माननीय, शांत और महान किरदार के रूप में याद किए जाएंगे।
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ रविवार (11 जनवरी) को 53 साल के हो गए। साल 1973 में आज के दिन ही उनका जन्म हुआ था। एक सामान्य परिवार में जन्में राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट की दुनिया में बहुत ही असाधारण प्रदर्शन किया है। पहले एक बल्लेबाज के रूप में उन्होंने कई कमाल किए और फिर कोच के रूप में भी वो सुपरहिट रहे हैं। टीम इंडिया का कोच पद छोड़ने के बाद द्रविड़ इन दिनों अपने घर-परिवार के साथ क्वालिटी समय बिता रहे हैं।
एक सफल क्रिकेट करियर के बाद द्रविड़ की कोचिंग में भारतीय टीम ने 2024 में टी20 विश्व कप जीता था। इसके बाद द्रविड़ ने अपना पद छोड़ दिया था। उनकी कोचिंग में टीम इंडिया विश्व टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे विश्व कप का फाइनल भी खेल चुकी है। वह अपने समय के बेहतरीन बल्लेबाजों में रहे हैं। टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ के कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जिन्हें तोड़ना मुश्किल है।
विज्ञापन
2 of 12
द्रविड़ और अगरकर
- फोटो : ANI
लंबे समय तक भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ रहे द्रविड़ की प्रमुख उपलब्धियां
कुल 24,208 अंतरराष्ट्रीय रन।
48 अंतरराष्ट्रीय शतक।
5 दोहरे शतक।
146 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतकीय पारियां।
2024 टी20 विश्व कप के विजेता हेड कोच।
2013 में पद्म भूषण से सम्मानित।
2004 में आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर।
2018 में आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल।
विज्ञापन
3 of 12
बाएं से- राहुल द्रविड़, इरफान पठान, एमएस धोनी और हरभजन सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
द्रविड़ का शुरुआती जीवन
राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी, 1973 को इंदौर में हुआ था। इनका पूरा नाम राहुल शरद द्रविड़ है। जन्म के बाद ही उनका परिवार कर्नाटक चला गया। द्रविड़ ने 12 साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 के लिए कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया। बचपन में ही पूर्व क्रिकेटर केकी तारापोर ने इन्हें क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं।
द्रविड़ ने फरवरी 1991 में रणजी ट्रॉफी में खेलकर क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने अपने पहले मैच में 82 रन की जबर्दस्त पारी खेली। द्रविड़ को अंतरराष्ट्रीय एक दिवसीय मैच में खेलने का मौका श्रीलंका के खिलाफ अप्रैल 1996 में मिला जबकि टेस्ट में उन्होंने अपना पहला मैच जून 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला। टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ के कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जिन्हें तोड़ना मुश्किल है। आइए जानते हैं...
4 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : BCCI
1. सबसे ज्यादा गेंदों का सामना करने का रिकॉर्ड
अपने पूरे करियर में द्रविड़ गेंदबाजों के लिए एक बुरे सपने की तरह रहे। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने कुल 31,258 गेंदों का सामना किया, जो कि एक अद्भुत विश्व रिकॉर्ड है। यह समझने के लिए कि यह कितना बड़ा आंकड़ा है, आपको बस ये जानना होगा कि 31 हजार गेंदों का मतलब 5210 ओवर से ज्यादा बल्लेबाजी करना! आधुनिक क्रिकेट में कम होती टेस्ट बैटिंग और बदलते एप्रोच के चलते इस रिकॉर्ड को टूटते देखना बहुत मुश्किल लगता है।
टेस्ट में सबसे ज्यादा गेंदों का सामना करने का रिकॉर्ड
खिलाड़ी
देश
गेंदें खेलीं
राहुल द्रविड़
भारत
31,258
सचिन तेंडुलकर
भारत
29,437+
जैक कैलिस
दक्षिण अफ्रीका
28,903
शिवनारायण चंद्रपॉल
वेस्टइंडीज
27,395
एलन बॉर्डर
ऑस्ट्रेलिया
27,002+
विज्ञापन
5 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : BCCI
2. क्रीज पर सबसे ज्यादा समय बिताने वाले खिलाड़ी
राहुल द्रविड़ को बल्लेबाजी एक “ध्यान” की तरह पसंद थी। वह विकेट संभालकर टीम को मजबूत करना जानते थे। यही कारण है कि टेस्ट इतिहास में क्रीज पर सबसे ज्यादा मिनट बिताने का विश्व रिकॉर्ड भी उनके नाम है- कुल 44,152 मिनट! यह आंकड़ा सर्वकालिक महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से भी ज्यादा है। लंबे मैच, मुश्किल परिस्थितियां, तेज गेंदबाज, द्रविड़ सबके सामने खड़े रहे और 'द वॉल' की छवि कमाई।
टेस्ट में सबसे ज्यादा समय क्रीज पर बिताने का रिकॉर्ड
क्रम
खिलाड़ी
देश
समय (मिनट)
1
राहुल द्रविड़
भारत
44,152 मिनट
2
सचिन तेंदुलकर
भारत
41,304 मिनट
3
जैक कैलिस
दक्षिण अफ्रीका
38,400+ मिनट
4
शिवनारायण चंद्रपॉल
वेस्टइंडीज
37,750+ मिनट
5
एलिस्टेयर कुक
इंग्लैण्ड
37,331 मिनट
विज्ञापन
6 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : BCCI
3. टेस्ट में सचिन के साथ सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी
द्रविड़ केवल खुद रन नहीं बनाते थे, बल्कि अपने साथी बल्लेबाजों को भी बेहतर खेलते थे। साझेदारी बनाना उनकी सबसे बड़ी कला थी। उनके नाम टेस्ट इतिहास में 100 या उससे अधिक रनों की सबसे ज्यादा साझेदारियां- 71। इस सूची में दूसरे नंबर पर सचिन तेंदुलकर हैं, जिन्होंने 66 ऐसी साझेदारियां कीं। यह दिखाता है कि द्रविड़ टीम गेम में कितना महत्वपूर्ण रोल निभाते थे। टेस्ट में द्रविड़ और सचिन के नाम सबसे ज्यादा बार 100+ रन की साझेदारी करने का रिकॉर्ड है। इन दोनों ने 20 बार शतक या उससे ज्यादा रन की साझेदारी की। इस रिकॉर्ड के आसपास फिलाहल कोई नहीं है।
टेस्ट में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारियां करने वाली जोड़ी
साझेदारी (खिलाड़ी)
टीम
शतकीय साझेदारियां
राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर
भारत
20
महेला जयवर्धने, कुमार संगकारा
श्रीलंका
19
गॉर्डन ग्रीनिज, डेसमंड हेयन्स
वेस्टइंडीज
16
मैथ्यू हेडन, रिकी पोंटिंग
ऑस्ट्रेलिया
16
जैक हॉब्स, हर्बर्ट सटलिफ
इंग्लैंड
15
विज्ञापन
7 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : BCCI
4. सबसे ज्यादा बार 300+ रन की साझेदारी करने वाले भारतीय बल्लेबाज
राहुल द्रविड़ को लंबी साझेदारी करना बेहद पसंद था। वह केवल 100 या 150 रन पर नहीं रुकते थे। टेस्ट क्रिकेट में वह भारत के लिए सबसे ज्यादा बार 300+ रन की साझेदारी करने वाले बल्लेबाज हैं। साथ ही वह दुनिया के सबसे ज्यादा 100+ रन की साझेदारी करने वाले बल्लेबाज भी हैं। 300+ रन की साझेदारी उन्होंने कुल तीन बार की है। ऐसे स्कोर विपक्षी को मैच से बाहर कर देते हैं, और यही द्रविड़ की बल्लेबाजी की खूबसूरती थी। वहीं, 100+ रन की साझेदारी उन्होंने 71 बार की है। इनमें नौ बार 200+ रन की साझेदारी और तीन बार 300+ रन की साझेदारियां भी शामिल हैं।
टेस्ट में सबसे ज्यादा 100+ रन की साझेदारियां
खिलाड़ी
टेस्ट
300+
200+
100+
50+
राहुल द्रविड़
119
3
9
71
159
सचिन तेंदुलकर
146
2
14
66
151
रिकी पोंटिंग
116
2
13
64
150
स्टीव वॉ
168
2
11
64
151
एलन बॉर्डर
156
1
6
63
167
ब्रायन लारा
131
1
9
62
146
सुनील गावस्कर
125
1
6
58
143
8 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : ANI
राहुल द्रविड़ की 5 बातें जो देती हैं जीवन की सीख
द्रविड़ अच्छे क्रिकेटर ही नहीं, बेहतरीन इंसान और विचारक भी हैं। उनकी कही बातें सिर्फ क्रिकेट नहीं, जीवन में भी प्रेरणा देती हैं। आइए जानते हैं...
द्रविड़ ने एक बार कहा था- 'कोई भी सपना अकेला पूरा नहीं किया जा सकता।'
द्रविड़ अपनी छवि को लेकर परवाह नहीं करते थे। उन्होंने हमेशा कहा, 'मैं जो हूं, वही हूं। मैंने जानबूझकर अपनी छवि नहीं बनाई है।'
द्रविड़ कई बार विफल भी हुए, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने कहा था, 'मैं कई बार असफल हुआ हूं, लेकिन मैंने कभी प्रयास करना नहीं छोड़ा।'
द्रविड़ अपने फैंस का खास ख्याल रखते थे और उन्हें मानते भी थे। उन्होंने एक बार कहा था, 'लोगों के बीच विश्वास सबसे मायने रखता है।'
द्रविड़ विदेशी खिलाड़ियों में सबसे सम्मानित क्रिकेटरों में से एक थे। उनका बयान इस बारे में बताता है। द्रविड़ ने एक बार कहा था, 'आप बदले के लिए नहीं खेलते, सम्मान और गर्व के लिए खेलते हैं।'
9 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : ANI
शानदार रहा है द्रविड़ का कैरियर
राहुल द्रविड़ ने अपने अंतरराष्ट्रीय कैरियर में 164 टेस्ट और 344 वनडे मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने दोनों फॉर्मेट में 10 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं। उन्होंने भारत की कप्तानी भी की है और जरूरत पड़ने पर विकेटकीपर भी बने हैं। द्रविड़ ने एक बार खुलासा किया था कि वो कभी भी विकेटकीपिंग और कप्तानी नहीं करना चाहते थे, लेकिन टीम ने उनसे दोनों काम करवाए। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर लगभग हर फॉर्मेट में शानदार बल्लेबाजी की। नीचे उनके करियर आंकड़े दिए गए हैं-
करियर स्टैट्स
फॉर्मेट
मैच
रन
सर्वश्रेष्ठ
औसत
100s
50s
टेस्ट
164
13288
270
52.31
36
63
वनडे
344
10889
153
39.16
12
83
T20I
1
31
31
31.00
0
0
प्रथम श्रेणी
298
23794
270
55.33
68
117
लिस्ट-ए
449
15271
153
42.30
21
112
10 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : ANI
द्रविड़ ने भी बल्लेबाज के रूप में कई बेहतरीन पारियां खेली हैं और कई लोगों का दिन खास बनाया है। उनकी पारियां तो एक दिन ज्यादा तक चलती थी और एक ही पारी कई लोगों का दिन बना देती थी। यहां हम उनकी टेस्ट में तीन सबसे बेहतरीन पारियों के बारे में बता रहे हैं...
1. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 180 रन बनाए
साल 2000 में भारत ने ईडन गार्डन्स के मैदान में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसे भारत की सबसे बड़ी टेस्ट जीत भी माना जाता है और द्रविड़ ही इस जीत के नायक थे। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर कर दिया था। इसके बाद द्रविड़ ने लक्ष्मण के साथा मिलकर शानदार साझेदारी की और अपनी टीम को जीत की दहलीज पर ले गए। इन दोनों ने मिलकर 386 रन जोड़े और मैच पलट दिया। लक्ष्मण ने 280 रन बनाए। वहीं द्रविड़ ने 180 रन की पारी खेली। भारत ने यह मैच 171 रन से जीता था और सीरीज में 1-1 की बराबरी की थी। इसके बाद चेन्नई में अगला टेस्ट जीतकर भारत ने सीरीज अपने नाम कर ली थी।
11 of 12
राहुल द्रविड़
- फोटो : ANI
2. ऑस्ट्रेलिया जाकर खेली 233 रन की पारी
साल 2003 में भी राहुल द्रविड़ ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 233 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 566 रनों का बड़ा स्कोर बनाया था। इसके जवाब में एक बार फिर द्रविड़ और लक्ष्मण ने बेहतरीन बल्लेबाजी की थी। इन दोनों ने 303 रन जोड़े थे और लक्ष्मण ने 148 रन की पारी खेली थी। अंत में भारत को यह मैच जीतने के लिए 233 रन की जरूरत थी और द्रविड़ ने दूसरी पारी में भी नाबाद 72 रन बनाए थे। वो टीम इंडिया को चार विकेट से जीत दिलाकर ही वापस लौटे थे।
3. पाकिस्तान के खिलाफ बनाए थे 270 रन
पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में द्रविड़ ने 270 रन की शानदार पारी खेली थी और अपनी टीम को जीत दिलाई थी। इस मैच से पहले दोनों टीमें सीरीज में एक-एक की बराबरी पर थीं। भारत ने टॉस जीतकर पाकिस्तान को 224 पर समेटा और इसके जवाब में 600 रन बनाए। द्रविड़ ने 270 रन की पारी खेली। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 245 रन पर सिमट गई और मैच 131 रन के बड़े अंतर से हार गई। यह पाकिस्तान की धरती पर भारत की पहली टेस्ट जीत थी।