प्रतीकात्मक तस्वीर
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फांसी देने का समय सुबह इसलिए मुकर्रर किया जाता है क्योंकि जेल नियमावली के तहत जेल के सभी कार्य सूर्योदय के बाद ही किए जाते हैं और फांसी के कारण जेल के बाकी कार्य प्रभावित न हों, इसलिए सुबह-सुबह कैदी को फांसी दे दी जाती है। इसकी एक वजह ये भी है कि फांसी से पहले और बाद में जेल अधिकारियों को बहुत सारी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जैसे मेडिकल टेस्ट, रजिस्टर में एंट्री, कई जगहों पर नोट्स भेजना इत्यादि। इसके बाद ही शव को परिवार वालों को सौंपा जाता है।