फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए क्यों सूरज के निकलने से पहले दी जाती है फांसी की सजा

Mon, 16 Sep 2019 11:03 AM IST
प्रशांत राय फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
फांसी (सांकेतिक) - फोटो : Amar Ujala
हम सभी ने फिल्मों और असल जीवन में देखा होगा कि किसी भी अपराधी को सुबह के वक्त फांसी दी जाती है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर क्यों फांसी की सजा सबको सुबह में ही दी जाती है। हम आपको इसके पीछे का कारण बताने जा रहे हैं। 

विज्ञापन

2 of 6
फांसी से पहले जेल प्रशासन अपराधी से उसकी आखिरी ख्वाहिश पूछता है। हालांकि कैदी की ख्वाहिश जेल मैन्युअल के तहत हो, तभी पूरी की जाती है। 
विज्ञापन

3 of 6
- फोटो : demo pic
फांसी देने से पहले जल्लाद कहता कि मुझे माफ कर दिया जाए, हिंदू भाईयों को राम-राम, मुसलमान भाइयों को सलाम। हम क्या कर सकते हैं हम तो हैं हुक्म के गुलाम।

4 of 6
- फोटो : amar ujala
फांसी देने के बाद 10 मिनट तक अपराधी को लटके रहने दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ये चेक करती है कि उसकी मौत हुई या नहीं, मौत की पुष्टि होने के बाद ही अपराधी को नीचे उतारा जाता है। 
विज्ञापन

5 of 6
- फोटो : social media
फांसी के समय जेल अधीक्षक, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और जल्लाद की मौजूदगी जरुरी होती है। इनमें किसी एक के भी ना होने पर फांसी नही दी जा सकती। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File photo
फांसी देने का समय सुबह इसलिए मुकर्रर किया जाता है क्योंकि जेल नियमावली के तहत जेल के सभी कार्य सूर्योदय के बाद ही किए जाते हैं और फांसी के कारण जेल के बाकी कार्य प्रभावित न हों, इसलिए सुबह-सुबह कैदी को फांसी दे दी जाती है। इसकी एक वजह ये भी है कि फांसी से पहले और बाद में जेल अधिकारियों को बहुत सारी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जैसे मेडिकल टेस्ट, रजिस्टर में एंट्री, कई जगहों पर नोट्स भेजना इत्यादि। इसके बाद ही शव को परिवार वालों को सौंपा जाता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें