जमीन से जुड़े वास्तु नियम
जिस जमीन पर मकान आदि का निर्माण करना हो, उस स्थान पर गृह स्वामी की कुहनी से मध्यमा अंगुली तक की लम्बाई नापकर उसी नाप का गहरा, लम्बा व चौड़ा गड्ढा कर लें एवं निकली हुई मिट्टी से गड्ढे को पुनः भर दें। यदि मिट्टी कम पड़े तो हानि, बराबर रहे तो न हानि न लाभ तथा मिट्टी शेष बच जाए तो ऐसी भूमि को सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाली समझना चाहिए।
नारायण भट्ट ग्रंथ के अनुसार सांयकाल सूर्यास्त के समय ऊपर बताए गए नाप का गड्ढा खोदकर उसे पानी से पूरा भर दें। प्रातःकाल जाकर देखें, यदि पानी शेष है तो शुभ, पानी नहीं बचा लेकिन मिट्टी गीली है तो मध्यम तथा सूखकर दरारें पड़ जाए तो भवन निर्माण के लिए इसे अशुभ माना गया है।
एक अन्य तरीके के अनुसार गड्ढे को जल से भरकर सौ कदम जाकर पुनः लौट कर देखें। गड्ढा अगर पूरा भरा हो तो उत्तम, चौथाई कम हो तो मध्यम, आधा या उससे कम रह जाए तो ऐसी भूमि वास्तु की दृष्टि में अच्छी नहीं मानी गई है।