सभी संकटों को हरने वाली गौमाता
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गौमूत्र में गंगा जी का वास बताया गया है, तभी तो आयुर्वेद में चिकित्सा के लिए गौमूत्र पीने की सलाह दी जाती है। सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु के साथ-साथ वरुण, वायु आदि देवताओं को यज्ञ में दी हुई प्रत्येक आहुति गाय के घी से देने की परंपरा है। जिससे सूर्य की किरणों को विशेष ऊर्जा मिलती है। यही विशेष ऊर्जा वर्षा का कारण बनती है और वर्षा से ही अन्न, पेड़-पौधों आदि को जीवन प्राप्त होता है। वैतरणी पार करने के लिए गौ दान की प्रथा आज भी हमारे देश में मौजूद है। श्राद्ध कर्म में भी गाय के दूध की खीर का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसी खीर से पितरों को तृप्ति मिलती है। पितर, देवता, मनुष्य सभी को शारीरिक बल गाय के दूध और घी से ही मिलता है।