2026 में बृहस्पति का मिथुन, कर्क और सिंह, तीन राशियों में गोचर बहुत लोगों का भाग्य बदल देगा, 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
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अतिचारी गुरु का गोचर और प्रभाव
मेदिनीय ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथो के अनुसार बृहस्पति का जल्दी-जल्दी राशि परिवर्तन करना, वक्री, मार्गी होना, जड़-चेतन में विशेष परिवर्तन की सूचना देता है। वर्तमान में देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में हैं, 2 जून 2026 में देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। गौरतलब है कि बृहस्पति वर्ष 2025 में कुछ समय के लिए अपनी उच्च कर्क राशि में थे, फिर दिसंबर 2025 के प्रारम्भ में कर्क राशि से लौटकर मिथुन राशि में प्रवेश कर गए। आगामी जून 2026 के प्रारम्भ में मिथुन राशि से फिर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
2026 में बृहस्पति का मिथुन, कर्क और सिंह, तीन राशियों में गोचर बहुत लोगों का भाग्य बदल देगा, 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। गोचर में बृहस्पति देवता जब किसी की जन्म राशि से चतुर्थ, अष्टम एवं द्वादश भाव में गोचर करते हैं, तो वह समय उसे व्यक्ति के लिए कष्टप्रद होता है। वैदिक ज्योतिष में अतिचारी चाल का अर्थ है कि बहुत तेज चलना और गुरु आने वाले 8 वर्षों का यानी 2032 तक अतिचारी चाल चलने वाले हैं।
आमतौर पर गुरु एक राशि से दूसरी राशि में जाने पर 12 से 13 महीनों का समय लगाते हैं लेकिन इस बार गुरु एक साल में तीन बार राशि बदलने वाले हैं। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, और अर्थव्यवस्था का कारक माना जाता है। जब बृहस्पति अतिचारी (सामान्य से तेज गति) होते हैं, तो वे अपनी शुभता खोकर देश-दुनिया में तेजी से बड़े, अप्रत्याशित और उथल-पुथल भरे बदलाव लाते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, मौसम और शासन-व्यवस्था पर पड़ता है।