मुख्यमंत्री हुए कार्यक्रमों में शामिल
सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 945.20 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 5.30 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमिपूजन किया। इस कॉरिडोर का उद्देश्य पुराने शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और महाकाल मंदिर समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना है।
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को दो प्रमुख हिस्सों में विकसित किया जाएगा। पहला हिस्सा इंद्रा नगर चौराहे से नीलगंगा चौराहे तक और दूसरा निकास चौराहे से इंदौर गेट तक बनाया जाएगा। इसके बनने से महाकाल मंदिर, काल भैरव और मंगलनाथ की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कालिदास अकादमी में होमगार्ड और एसडीआरएफ की ओर से लगाई गई आपदा प्रबंधन प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने बाढ़, आगजनी और अन्य आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने होमगार्ड की विशेष ट्रेनिंग का शुभारंभ भी किया। उन्होंने पुलिस बल, होमगार्ड जवानों और आपदा मित्रों को नियमित रूप से प्रशिक्षित और अलर्ट रखने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।
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सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने शहर में सुविधाओं के विस्तार के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने होटल, होम-स्टे, धर्मशाला, अस्पताल और मैरिज गार्डन जैसी सुविधाओं के विकास में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की अपील की। सरकार का फोकस सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में यातायात, आवास, चिकित्सा और आपदा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर है। एलिवेटेड कॉरिडोर समेत इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर की कनेक्टिविटी और श्रद्धालुओं की यात्रा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।