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प्राप्त जानकारी के अनुसार चेतन सगर (12 वर्ष), निवासी कुटावत, जिला धार की नर्मदा मंदिर घाट पर डूबने से मृत्यु हो गई। वहीं, रवि सोलंकी (38 वर्ष), निवासी बालगढ़, जिला देवास की नर्मदा मंदिर के समीप स्थित घाट पर डूबने से जान चली गई। दोनों घटनाओं की सूचना मिलते ही घाट क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया तथा परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिक मास एवं सोमवती अमावस्या जैसे विशेष अवसरों पर हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु महेश्वर पहुंचते हैं, इसके बावजूद सुरक्षा प्रबंध अपेक्षित स्तर के नहीं दिखाई दिए। घाटों पर पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित गोताखोर, बचाव दल और सुरक्षा जंजीरों की व्यवस्था नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि घाटों पर सावधानी संबंधी घोषणाएं भी नियमित रूप से सुनाई नहीं दीं।
वाहनों की लगी लंबी कतारें
वहीं, दिनभर नगर में यातायात व्यवस्था भी दबाव में रही। प्रमुख मार्गों और घाटों की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं को पार्किंग और आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नागरिकों का मानना है कि भीड़ के अनुमान के अनुरूप पुलिस बल और स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में घाटों के आसपास पर्याप्त एंबुलेंस, प्राथमिक उपचार केंद्र और आपातकालीन स्वास्थ्य दलों की तैनाती आवश्यक है। स्थानीय नागरिक राजू कुशवाहा ने प्रशासन से मांग की है कि आगामी धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। घाटों पर अतिरिक्त गोताखोरों की तैनाती, सुरक्षा जंजीरें, बचाव नौकाएं, प्रभावी उद्घोषणा प्रणाली, पर्याप्त पुलिस बल तथा सुदृढ़ चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।