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अखाड़ों पर संकट के बादल?: पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, अखाड़ा परिषद को खत्म करने की मांग उठाई

Thu, 26 Mar 2026 03:44 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अखाड़ा परिषद समाप्त करने की मांग की। महासंघ ने अखाड़ों पर व्यावसायीकरण, विवाद और अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए ऋषि परंपरा को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता बताई है।

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उज्जैन से उठी बड़ी मांग - फोटो : अमर उजाला
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अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देश में अखाड़ों और अखाड़ा परिषद को समाप्त करने की मांग की है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने पत्र में कहा कि सनातन धर्म में मूल रूप से ऋषि-मुनि परंपरा रही है, न कि अखाड़ों की। उनका कहना है कि अखाड़ों की स्थापना जिस उद्देश्य से की गई थी, वह अब पूरा हो चुका है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि आदि शंकराचार्य द्वारा लगभग ढाई से तीन हजार वर्ष पूर्व सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों की स्थापना की गई थी। लेकिन वर्तमान में कई अखाड़ों में साधु-संत पद, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य को लेकर आपसी विवादों में उलझे हुए हैं। हाल ही में उज्जैन में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए महासंघ ने कहा कि ऐसी घटनाएं सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।

महासंघ ने आरोप लगाया कि आज कई अखाड़े व्यावसायिक केंद्र बनते जा रहे हैं। साधु-संतों के निवास के लिए दिए गए स्थान अब गार्डन और यात्री गृह में बदल चुके हैं, जिनसे करोड़ों रुपये की आय हो रही है। इसके बावजूद सिंहस्थ जैसे आयोजनों के नाम पर सरकार से भारी धनराशि की मांग की जाती है, जबकि साधु-संतों को त्याग, तप और भजन में लीन रहना चाहिए।

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पत्र में यह भी कहा गया है कि संतों के लिए दीक्षा के बाद जमीन खरीदना-बेचना अनुचित माना जाता है, फिर भी कई स्थानों पर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के आरोप सामने आए हैं। महासंघ ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दावा किया कि जांच होने पर बड़ी मात्रा में जमीन साधु-संतों के नाम पर पाई जा सकती है।

अंत में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम को सप्त ऋषियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था, जिसके आधार पर रामराज्य की स्थापना हुई। इसी परंपरा को पुनर्स्थापित करने के लिए देश में अखाड़ा परिषद को समाप्त कर ऋषि परंपरा को बढ़ावा देने हेतु कानून बनाया जाना चाहिए।

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