महंत श्री मंगलदास त्यागी।
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'दान राशि का पूरा आय-व्यय सार्वजनिक किया जाना चाहिए'
महंत मंगलदास त्यागी ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से प्राप्त दान जनता की अमानत है। इसलिए दान राशि का पूरा आय-व्यय सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने कहा कि ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्राप्त दान राशि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किया जाना चाहिए। चूंकि मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता।
दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता हो-दूल्हे सिंह
दूल्हे सिंह दरबार (सदस्य, ममलेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति) ने कहा कि दान पेटियां प्रत्येक माह खोली जाती हैं और चढ़ावे की राशि की जानकारी मौखिक रूप से दी जाती है, लेकिन कुल राशि, बैंक खाते, जमा प्रक्रिया और व्यय का विस्तृत विवरण समिति के सदस्यों को भी उपलब्ध नहीं कराया जाता। केवल मोबाइल पर एसएमएस आता है कि 15 लाख या 16 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। उन्होंने दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की।
'पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा'
भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि यदि मंदिर प्रबंधन समिति गठित है, तो उसके सदस्यों, बैठकों, दान राशि, व्यय तथा शेष राशि का विवरण समय-समय पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। दान व्यवस्था में पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सिंहस्थ-2016 के बाद श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। इतनी बड़ी दान राशि आने के बावजूद उसका उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर होना चाहिए, लेकिन अब तक यह भी सार्वजनिक नहीं किया गया कि दान पेटियों में कुल कितनी राशि प्राप्त हुई है। प्रशासन को दान पेटियां स्थापित किए हुए एक वर्ष हो चुका है।
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एक वर्ष पूर्व परिहार परिवार की दान पेटियां हटा दी गईं थी
वहीं, अहिल्या ट्रस्ट के रुद्र दीक्षित ने बताया कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं तथा पूजा-अर्चना की व्यवस्था देवी अहिल्याबाई खासगी ट्रस्ट द्वारा की जाती है। पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा प्रतिदिन विधि-विधान से संपन्न होती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 से पहले मंदिर में आने वाली दान राशि पर दूल्हे सिंह परिवार का अपने पूर्वजों की परंपरा के अनुसार अधिकार था। लगभग एक वर्ष पूर्व इस परिवार की दान पेटियां हटा दी गईं और प्रशासन ने अपनी दान पेटियां स्थापित कर अपने कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी। दान पेटियां स्थापित करने से पहले प्रशासन ने औपचारिक रूप से जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों को शामिल कर समिति का गठन तो किया, लेकिन समिति के सदस्यों को आज तक आय-व्यय का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।