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इंदौर: अनंत चतुर्दशी की 103 साल पुरानी झांकी परंपरा का फीका पड़ा रंग, नयापन जरूरी, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

Tue, 29 Sep 2026 11:55 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाले झांकी चल समारोह में इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कम रही भीड़, कई जगह दुकानें भी बंद रहीं। हर साल चल समारोह के दूसरे दिन स्थानीय अवकाश रहता है, लेकिन इस बार अवकाश नहीं होने का असर भी समारोह पर दिखाई दिया।
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इस बार रही कम भीड़ - फोटो : amarujala
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विस्तार
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इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली झांकियों की परंपरा 103 साल पुरानी है, लेकिन समय के साथ अब इसका रंग फीका पड़ने लगा है। इस बार पिछले साल की तुलना में झांकी के चल समारोह में कम भीड़ रही। शहर की तासीर समझने वाले लोगों का कहना है कि अब इस परंपरा में नएपन के साथ सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। इस साल कृष्णपुरा छत्री से राजवाड़ा तक भीड़ रही, जबकि चिमनबाग, जेल रोड और जवाहर मार्ग में कम भीड़ थी। चल समारोह के दौरान जो लोग व्यापार करने आते हैं, वे भी मान रहे थे कि इस बार उनका सामान कम बिका। लोगों ने ज्यादा खरीदारी नहीं की।

दुकानें रहीं बंद

जब सड़कों पर झांकियां निकलती थीं, तो आठ किलोमीटर लंबे रूट के दोनों तरफ आने वाली दुकानें दर्शक दीर्घा में तब्दील हो जाती थीं। दुकानें रातभर खुली रहती थीं और व्यापारियों के परिजन और परिचित दुकानों में बैठकर झांकियों को निहारते थे, लेकिन इस बार कई दुकानों के शटर गिरे हुए थे। परिजनों ने झांकियां देखने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। हर साल चल समारोह के दूसरे दिन स्थानीय अवकाश रहता है, लेकिन इस बार उसे भी नहीं रखा गया।

छतों की बुकिंग होना चाहिए

अभ्यास मंडल के पूर्व अध्यक्ष शिवाजी मोहिते कहते हैं कि इस परंपरा में अब ताजगी जरूरी है। प्रदेश में सबसे पहले झांकियां निकालने की परंपरा इंदौर में शुरू हुई। फिर दूसरे शहरों ने भी इसे अपनाया। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और रायपुर में 90 साल पहले से झांकियां निकल रही हैं, लेकिन वहां यह परंपरा समय के साथ समृद्ध होती गई। अभी राजनांदगांव की कांतारा झांकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हो रही है। छत्तीसगढ़ सरकार अच्छी झांकियों को दस से पंद्रह लाख रुपये तक के पुरस्कार देती है, लेकिन हमारे शहर में इस तरह का आर्थिक प्रोत्साहन नहीं मिलता है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी कहते हैं कि परंपरा में नएपन से ज्यादा जरूरत सुविधा बढ़ाने की है। झांकी रूट की छतें बुकमायशो से बुक कराई जानी चाहिए, ताकि जो लोग परिवार के साथ आना चाहें, उन्हें बैठने की सुविधा मिल सके। प्रशासन को भी इसके लिए अलग से ब्लॉक बनाना चाहिए।

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