मौसम की पहली ही भीषण बरसात ने ओंकारेश्वर क्षेत्र में व्यापक तबाही मचा दी। रविवार को अचानक आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं भारी नुकसान भी पहुंचाया। तेज हवाओं के कारण सैकड़ों वर्ष पुराने विशाल वृक्ष धराशायी हो गए, बिजली व्यवस्था ठप पड़ गई और कई मकानों की टीन शेड व छप्पर उड़ गए। प्राकृतिक आपदा के इस रूप से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए। कुछ ही मिनटों में तेज हवाओं ने तूफान का रूप ले लिया। हवा की रफ्तार इतनी अधिक थी कि बड़े-बड़े वृक्ष जड़ों समेत उखड़कर सड़कों और मकानों पर गिर पड़े। कई स्थानों पर पेड़ों के गिरने से यातायात बाधित हो गया। स्थानीय लोगों ने स्वयं आगे आकर रास्तों से पेड़ हटाए, जिससे आवागमन बहाल हो सका।
ओंकारेश्वर, मोरटक्का, मांधाता, बड़वाह और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आंधी-बारिश का व्यापक असर देखने को मिला। अनेक मकानों की टीन शेड उड़ गईं, जिससे घरों में पानी भर गया। कुछ स्थानों पर कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में रखी कृषि सामग्री और चारे को क्षति पहुंची, जबकि कई किसानों ने फसलों को नुकसान होने की जानकारी दी।
तूफान के कारण बिजली विभाग को भी भारी नुकसान हुआ। कई स्थानों पर बिजली के खंभे झुक गए और विद्युत तार टूटकर जमीन पर गिर पड़े। सुरक्षा के मद्देनजर कई क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी। इसके चलते ओंकारेश्वर क्षेत्र के अनेक गांवों और कस्बों में घंटों तक अंधेरा छाया रहा। बिजली बाधित होने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
अफरातफरी का माहौल बन गया
धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और मां नर्मदा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। अचानक आए तूफान और बारिश के कारण श्रद्धालुओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई श्रद्धालु सुरक्षित स्थानों की तलाश में इधर-उधर भागते नजर आए। घाटों और मंदिर परिसर में कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार पिछले कई वर्षों में इस तरह की तेज आंधी और बारिश कम ही देखने को मिली है। विशेष रूप से सैकड़ों वर्ष पुराने वृक्षों का गिरना तूफान की तीव्रता को दर्शाता है। पर्यावरण प्रेमियों ने इसे क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर के लिए बड़ी क्षति बताते हुए चिंता व्यक्त की है।
तूफान थमने के बाद प्रशासन और नगर परिषद की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने का काम देर रात तक जारी रहा। अधिकारियों ने नागरिकों से टूटे हुए विद्युत तारों से दूर रहने और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है।
क्या बताया मौसम विभाग ने?