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MP News: गणतंत्र दिवस पर मध्यप्रदेश की जेलों से 87 आजीवन बंदी होगे समय से पहले रिहा, 394 को नहीं मिली पात्रता

Mon, 12 Jan 2026 08:48 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

गणतंत्र दिवस 2026 पर मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में बंद 87 आजीवन कारावास के बंदियों को समयपूर्व रिहाई की अनुमति दी है। यह फैसला सुधारात्मक न्याय और अच्छे आचरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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जेल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में बंद आजीवन कारावास के बंदियों को बड़ी राहत दी है। जेल विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कुल 481 आजीवन दंडित बंदियों के मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 87 बंदियों को समयपूर्व रिहाई के लिए पात्र पाया गया है। वहीं, 394 बंदियों को निर्धारित शर्तें पूरी न होने के कारण अपात्र घोषित किया गया है। यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया गया है। राज्य सरकार ने अपने पूर्व आदेश के तहत गठित प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक प्रकरण में कानूनी प्रावधानों, बंदियों के आचरण, अपराध की पृष्ठभूमि और अन्य तथ्यों का गहन परीक्षण किया।
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रिहाई पर ये शर्तें होंगी लागू
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन बंदियों की सजा के विरुद्ध उच्च या सर्वोच्च न्यायालय में अपील लंबित है, उन्हें 26 जनवरी 2026 तक अपील का निराकरण होने की स्थिति में ही रिहाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, जिन आजीवन बंदियों को जुर्माने की सजा भी दी गई है, यदि जुर्माना राशि निर्धारित तिथि तक जमा नहीं की जाती है, तो उन्हें केवल आजीवन कारावास की सजा से मुक्त कर जुर्माने की सजा भुगतने के लिए रोका जाएगा। अन्य प्रकरणों में शेष सजाएं, लंबित मामले या जमानत की स्थिति के आधार पर भी बंदियों के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिन बंदियों के मामले अन्य राज्यों के न्यायालयों में लंबित हैं या जिन्हें अन्य राज्यों में दंडित किया गया है, उन्हें संबंधित राज्य की जेलों में स्थानांतरित करने का प्रावधान भी आदेश में शामिल है।
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अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय सुधारात्मक न्याय की दिशा में एक मानवीय पहल है। उन्होंने कहा कि अच्छे आचरण और निर्धारित अवधि पूर्ण करने वाले बंदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर देना इस नीति का उद्देश्य है। गणतंत्र दिवस पर लागू होने वाले इस फैसले से 87 बंदियों और उनके परिवारों में नई उम्मीद जगी है, जबकि शेष मामलों में भविष्य में पुनः समीक्षा की संभावना बनी रहेगी।
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