बीएमसी और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त बैठक
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राजधानी में बारिश के बीच डेंगू और चिकुनगुनिया का खतरा बढ़ने से पहले प्रशासन सख्ती की तैयारी में है। अब खाली प्लॉट में पानी जमा छोड़ना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग, जिला मलेरिया कार्यालय और नगर निगम की संयुक्त टीमें शहरभर में लार्वा की तलाश करेंगी। पानी जमा मिला और समझाइश के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी तो नगर निगम मौके पर ही जुर्माना लगाएगा।अभियान में सिर्फ घर और कॉलोनियां ही नहीं, बल्कि शहर के बड़े निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में होंगे। मेट्रो परियोजना, सड़क और पुल निर्माण स्थल, लोक निर्माण विभाग के कार्यस्थल, मैरिज गार्डन, हाट-बाजार और निर्माणाधीन इमारतों में विशेष जांच की जाएगी। राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हिमांशु जायसवार और नगर निगम उपायुक्त हिरेंद्र कुशवाहा की मौजूदगी में समीक्षा की गई। राज्य स्तर से डॉ. संतोष भार्गव नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों, क्षेत्रीय अधिकारियों और मलेरिया विभाग के पर्यवेक्षकों को अभियान की जिम्मेदारी तय की गई।
पुराने वाहन और बेकार पानी की टंकियां भी जांच के दायरे में
शहर में लंबे समय से एक जगह खड़े पुराने और कंडम वाहनों की भी जांच होगी। अनुपयोगी पानी की टंकियों में पानी जमा है या नहीं, टीमें इसकी पड़ताल करेंगी। मच्छरों का लार्वा पनपने की स्थिति मिलने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था को सुधार के निर्देश दिए जाएंगे। नगर निगम उपायुक्त हिरेंद्र कुशवाहा के अनुसार, जलभराव वाले स्थानों पर पहले समझाइश दी जाएगी। इसके बाद भी पानी निकासी या सफाई नहीं हुई तो मौके पर जुर्माना और चालानी कार्रवाई की जाएगी।
हर सप्ताह घरों में मनाया जाएगा सूखा दिवस
डेंगू की रोकथाम के लिए हर सप्ताह 'सूखा दिवस' मनाने की तैयारी है। इस दिन घरों में रखे पानी के बर्तन खाली कर उन्हें सुखाया जाएगा। रहवासी समितियों और सोसायटियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। शहर के तालाबों और पानी भरे गड्ढों को चिह्नित कर उनमें तेल की गोलियां डाली जाएंगी। सभी वार्डों में तय समय पर धुआं छिड़काव किया जाएगा। संक्रमित क्षेत्रों में विशेष धुआं छिड़काव को प्राथमिकता मिलेगी।
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बुखार आया तो तुरंत कराएं खून की जांच
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की है। बुखार या डेंगू-चिकुनगुनिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर तत्काल खून की जांच कराने को कहा गया है। अब नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की नजर उन जगहों पर होगी, जहां बारिश का पानी कई दिनों तक जमा रहता है। यानी खाली प्लॉट और निर्माण स्थल पर लापरवाही अब जेब पर भारी पड़ सकती है।