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Bhopal News: बस हड़ताल की हवा पड़ी उलटी, एमपी में बसें खाली, बाहर जाने वालों से वसूला जा रहा दोगुना किराया

Mon, 02 Mar 2026 05:44 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल

सार

होली से पहले 2 मार्च को घोषित बस हड़ताल भले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद वापस ले ली गई, लेकिन इसकी घोषणा का असर अब भी दिखाई दे रहा है। भोपाल से प्रदेश के अंदर चलने वाली बसों में सवारियां कम हो गई हैं, क्योंकि यात्रियों ने असमंजस के चलते अपनी यात्राएं टाल दीं। वहीं दूसरी ओर, होली के चलते दूसरे राज्यों जैसे जयपुर, पुणे और अहमदाबाद जाने वाली बसों का किराया दोगुना तक बढ़ा दिया गया है। 
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आईएसबीटी बस स्टैंड भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 होली से ठीक पहले बस ऑपरेटरों की हड़ताल की घोषणा अब उन्हीं पर भारी पड़ती दिख रही है। 2 मार्च को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी बंद की खबर ने यात्रियों में ऐसा असमंजस पैदा किया कि लोगों ने अपनी यात्राएं टाल दीं। भले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद हड़ताल अंतिम समय में वापस ले ली गई, लेकिन उसका असर अब भी सड़कों पर साफ नजर आ रहा है।राजधानी भोपाल से छिंदवाड़ा, रायसेन, हरदा, बैतूल, इटारसी और नर्मदापुरम जाने वाली बसों में सवारियों की भारी कमी देखी जा रही है। हालत यह है कि कई बसें आधी खाली चल रही हैं। स्थानीय रूटों पर यात्रियों की संख्या घटने से संचालकों और कर्मचारियों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है।
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बाहर जाने वालों पर ‘होली सरचार्ज’
जहां प्रदेश के अंदर बसें खाली दौड़ रही हैं, वहीं दूसरे राज्यों की ओर जाने वाली लग्जरी और स्लीपर बसों में हालात बिल्कुल उलट हैं। होली के कारण यात्रियों की भीड़ का फायदा उठाकर निजी ऑपरेटरों ने किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी है।भोपाल से जयपुर का किराया 700-800 रुपये से बढ़ाकर 1600-2000 रुपये तक वसूला जा रहा है। भोपाल से पुणे का किराया 1300-1500 रुपये से बढ़कर 1600-1800 रुपये तक पहुंच गया है।भोपाल से अहमदाबाद का किराया 800-1000 रुपये से बढ़कर 1200-1600 रुपये तक लिया जा रहा है।यात्रियों का आरोप है कि त्योहार की मजबूरी का खुला फायदा उठाया जा रहा है और किराए में बढ़ोतरी पर कोई नियंत्रण नजर नहीं आ रहा।

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दोहरी मार में यात्री
एक तरफ हड़ताल की घोषणा ने यात्रियों का भरोसा तोड़ा, तो दूसरी ओर त्योहार के मौके पर बढ़े किराए ने उनकी जेब ढीली कर दी। प्रदेश के अंदर बस ऑपरेटर सवारियों को तरस रहे हैं, जबकि राज्य से बाहर जाने वालों से मोटी कमाई की जा रही है। कुल मिलाकर, हड़ताल की रणनीति ने बाजार का गणित बिगाड़ दिया है।

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