ऊर्जा मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं के टैरिफ यानी बिजली दर में जोड़ा जाए। इस आदेश का विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विरोध किया है। इसे उपभोक्ताओं के साथ धोखा करार दिया है। ऊर्जा मंत्रालय को विरोध प्रस्ताव भेज कर आदेश रद्द करने की मांग की है।
परिषद अध्यक्ष ने बताया कि सिंगल फेस मीटर की औसत कीमत 872 रुपये मानी जाए तो प्रदेश के उपभोक्ताओं ने लगभग 2,616 करोड़ खर्च किया है। थ्री फेस मीटर की लागत जोड़ने पर यह राशि करीब 3,000 करोड़ पहुंचती है। यानी गारंटी अवधि के भीतर मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने से प्रदेश की जनता का करीब 3,000 करोड़ रुपये पानी में चला जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने पहले गाइडलाइन जारी कर कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर सहित पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रति मीटर 6,000 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन टेंडर 8,000 से 9,000 रुपये प्रति मीटर की दर से अवार्ड कर दिए गए। अब सरकार ने यह अतिरिक्त आदेश जारी कर उसकी लागत भी उपभोक्ताओं से वसूलने की तैयारी है, जो पूरी तरह से गलत है।