8 अगस्त 2002 को दिनदहाड़े हुई थी हत्या
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अगस्त 2002 को शाम करीब 4 से 4:30 बजे के बीच कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे बक्शी दीदी के घर के पास अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने थाना कैसरबाग में कई नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपी गई थी जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। विवेचना के दौरान सीबीआई ने मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल, छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने लाए। जांच में यह भी सामने आया कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने 12 बोर के तमंचे से इंद्रदेव सिंह को गोली मारी थी।
22 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला
सीबीआई ने वर्ष 2004 में आरोप पत्र दाखिल किया था और उसी वर्ष आरोप भी तय हुए थे। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी के तहत दोषी ठहराया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अन्य तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है।