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UP: रजिस्ट्री से पहले जमीन के मालिकाना हक की होगी जांच, फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपत्ति बेचने पर लगेगी रोक

Tue, 04 Aug 2026 10:31 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

रजिस्ट्री के समय संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, नामांतरण और हस्तांतरण अधिकार जैसे अभिलेखों की जांच की जाएगी। 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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यूपी विधानसभा ने मंगलवार को स्टांप एवं पंजीयन विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। विधेयक के तहत रजिस्ट्री कार्यालय में संपत्ति के मालिकाना हक की भी जांच होगी। दूसरे विधेयक में दान की संपत्ति के निबंधन शुल्क को सर्किल रेट से जोड़ने का प्रावधान है। अब तक विभाग केवल संपत्ति के मूल्य, सर्किल रेट और राजस्व पहलुओं की जांच करता था। संपत्ति के मालिक की पड़ताल खरीदार की जिम्मेदारी मानी जाती थी। इसी का फायदा उठाकर एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचने के मामले सामने आते थे। नए प्रावधानों से फर्जी दस्तावेज के सहारे संपत्ति बेचने पर रोक लगेगी।

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विधेयक केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, क्योंकि इसमें केंद्रीय कानून में संशोधन का प्रावधान है। मंजूरी के बाद प्रदेश में इसके क्रियान्वयन के लिए शासनादेश जारी होगा। रजिस्ट्री के समय संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, नामांतरण और हस्तांतरण अधिकार जैसे अभिलेखों की जांच की जाएगी। यदि दस्तावेज से विक्रेता का मालिकाना हक स्पष्ट नहीं होता है, तो उप निबंधक को रजिस्ट्री रोकने का अधिकार मिलेगा।

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दान की संपत्ति पर शुल्क का विवाद भी खत्म होगा
दूसरे विधेयक में दानपत्र के जरिये संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े निबंधन शुल्क को स्पष्ट किया गया है। कृषि, आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां इसके दायरे में होंगी। अब निबंधन शुल्क संपत्ति के सर्किल रेट के आधार पर एक प्रतिशत निर्धारित किया जाएगा। इससे रजिस्ट्री के समय संपत्ति के वास्तविक बाजार मूल्य को लेकर विभाग और संपत्ति मालिक के बीच होने वाले विवाद कम होंगे। स्टांप एवं पंजीयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि सरकार लगातार बाधा बनने वाले जटिल और अस्पष्ट नियमों को खत्म कर रही है। इसी के तहत दोनों विधेयक पारित हो गए हैं।

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