क्या कहते हैं जानकार
कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रही है सपा
समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान कहते हैं कि कांशीराम हमेशा दलित- पिछड़ों के हाथ में सत्ता की ताकत देन चाहते थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी अब उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
वह जाति जनगणना कराकर आबादी के अनुपात में हर वर्ग को भागीदारी देने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
कांशीराम ने दलितों को सांसद, विधायक बनाया, जबकि बसपा धनाढ्य लोगों को टिकट देती है। लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बामसेफ कैडर के वंशीधर बौद्ध को विधानसभा भेजकर यह साबित किया कि वह कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रहे हैं।
बसपा को लेकर संशय में है दलित वोटबैंक
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो राजेंद्र वर्मा कहते हैं कि सियासी दल वोटबैंक के हिसाब से अपना नजरिया बदलते हैं। इन दिनों दलित वोटबैंक बसपा को लेकर संशय में है। यह वोटबैंक डा. भीमराव आंबेडकर के बाद कांशीराम को अपना आदर्श मानता है।
यही वजह है कि इस वर्ष कांशीराम की जयंती पर तमाम बड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। कांग्रेस बसपा संस्थापक कांशीराम द्वारा दिए गए नारे जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी को फिर से पुनर्जीवित करके अपना सियासी वनवास खत्म करने की कोशिश में जुटी है।
कांग्रेस ने हमेशा रखा दलितों का साथ
कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव कहते हैं कि कांग्रेस ने हमेशा दलितों का ध्यान रखा है। अब कांशीराम के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। यही वजह है कि लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में खुद राहुल गांधी हिस्सा ले रहे हैं। यहां से शुरू होने वाले अभियान पूरे प्रदेश में पहुंचेगा और कांशीराम के विचारों को जन- जन तक पहुंचाया जाएगा।