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यूपी: बादल खूब बरसे, फिर भी प्यासे रह गए प्रदेश के ये 28 जिले; मानसून की मेहरबानी में बड़ा अंतर; जानें वजह

Sat, 05 Sep 2026 10:16 AM IST
Akash Dwivedi विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश का वितरण असमान बना हुआ है। प्रदेश के 28 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। आठ जिलों में कमी 60 से 90 प्रतिशत तक है, जबकि 20 जिलों में 20 से 59 प्रतिशत कम वर्षा हुई। अब सितंबर की बारिश से कमी पूरी होने की उम्मीद है।
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यूपी के मौसम का हाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक ही प्रदेश, एक ही मानसून और बारिश की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें। कहीं पानी ही पानी, कहीं बारिश की भारी कमी। उत्तर प्रदेश में कहीं बादल जमकर बरस रहे हैं तो कहीं उनके इंतजार में खेत सूखे पड़े हैं। अगस्त में भारी बारिश के दौर के बावजूद प्रदेश के आठ जिलों में सामान्य से 60 से 90 फीसदी तक कम वर्षा दर्ज की गई है।

आठ जिले अब भी अच्छी बारिश को तरसे

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में मानसून की बारिश का वितरण अब भी बेहद असमान है। आठ जिलों में सामान्य से 60 से 90 फीसदी तक कम वर्षा दर्ज की गई है। इनमें भदोही, देवरिया, कुशीनगर, कानपुर देहात, गाजियाबाद और शामली समेत अन्य जिले शामिल हैं। यानी कई इलाकों में अगस्त की तेज बारिश के बावजूद पानी की कमी बनी हुई है।

 

 

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20 और जिलों में भी सामान्य से कम बरसे बादल

प्रदेश के 20 अन्य जिलों में भी सामान्य से 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश हुई है। इनमें गोरखपुर, जौनपुर, महाराजगंज, मऊ, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सीतापुर जैसे जिले शामिल हैं। इससे साफ है कि अच्छी बारिश का दौर आने के बावजूद मानसून का फायदा प्रदेश के सभी हिस्सों तक एक जैसा नहीं पहुंच सका।

कहीं जलभराव, कहीं सूखे जैसे हालात

हाल के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में तेज और भारी बारिश हुई। कहीं सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव हुआ तो कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ गया। इसके उलट कम बारिश वाले जिलों में खेतों और ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी बनी हुई है। एक ही समय में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की यह विपरीत तस्वीर मानसून के असमान वितरण को साफ तौर पर सामने ला रही है।

 

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सितंबर की बारिश पर टिकी नजर

कम बारिश वाले जिलों के लिए अब सितंबर की बारिश बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। सितंबर मानसून का अंतिम चरण है और इसी महीने की वर्षा से अब तक की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है।
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