मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 तक प्रदेश में 82 अतिदोहित और 47 क्रिटिकल क्षेत्र थे। लेकिन जलसंरक्षण के लिए लगातार हो रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2024 में यह घटकर 50 अतिदोहित और 45 क्रिटिकल क्षेत्र रह गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी वर्षों में ऐसे क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास करें।