विवाद की सूचना पाकर हरदोई से इंद्रपाल और गोंडा से ज्योति के परिजन लखनऊ पहुंचे और समझौता कराया। सुलह के बाद सत्येंद्र को मकान मालिक मानसिक रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टर के पास ले गए थे। परिजनों ने बताया कि सत्येंद्र ने दवा नाली में फेंक दी थी। खाना खाने के बाद ज्योति अलग कमरे में लेट गईं। सत्येंद्र बेटी समृद्धि के साथ अलग कमरे में सोने चले गए। ज्योति के मुताबिक शुक्रवार रात करीब तीन बजे बेटी के कराहने की आवाज सुनकर उनकी नींद खुल गई। वह कमरे में गईं तो समृद्धि बदहवास थी। सत्येंद्र के बारे में पूछा तो उसने रोते हुए बताया कि वह सो रही थी। इसी दौरान पिता ने उसके मुंह पर तकिया रखी और गला दबाकर मारने का प्रयास किया।
तुम्हें मारकर मैं भी मर जाऊंगा...
समृद्धि ने बताया कि गला दबाते हुए पापा बोल रहे थे कि तुम्हें मारकर मैं भी मर जाऊंगा। इसके बाद वह कमरे से तेजी से निकल गए। ज्योति के मुताबिक गंभीर हालत में उन्होंने बेटी को सिविल में भर्ती कराया। पोस्टमार्टम हाउस में ज्योति ने रोते हुए बताया कि सत्येंद्र बेटी को बहुत प्यार करते थे, पर उसका गला दबाते समय उनका हाथ नहीं कांपा। पोस्टमार्टम के बाद सत्येंद्र के परिजन शव लेकर चले गए। ज्योति का आरोप है कि उन्हें अंतिम दर्शन तक नहीं कराए गए। इंस्पेक्टर महानगर का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। अभी किसी पक्ष ने तहरीर नहीं दी है।