अभिषेक सहज
लखनऊ। एक समय रंगमंच में महिलाओं की संख्या अभिनय के लिहाज से नाममात्र की हुआ करती थी। धीरे-धीरे अभिनय के क्षेत्र में महिलाओं का दखल बढ़ता गया। ...और अब महिलाओं ने लेखन और निर्देशन की बागडोर भी संभाल ली है। शहर की महिलाओं ने रंगमंच को अपने निर्देशन से न सिर्फ संवारा है बल्कि उसे नई दिशा भी दी है। इनमें पूर्वा नरेश का नाम अग्रिम पंक्ति में आता है जिनके लेखन और निर्देशन की चमक अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंची है। पूर्वा नरेश ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि मेरा लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए भारत में ही तैयार किए गए संगीतमय नाटकों का निर्माण करूं।
एक लेखिका, नर्तकी, पखावज वादक के साथ ही अभिनय में भी पूर्वा नरेश को महारत हासिल है। मुंबई में रह रहीं पूर्वा बताती हैं कि उन्होंने अपने पिता प्रख्यात कवि नरेश सक्सेना से रचनात्मक लेखन सीखा तो मां विजया नरेश से गायन की तालीम ली। पूर्वा ने रजित कपूर के प्रोडक्शंस के लिए अफसानेह : बाई से बायोस्कोप तक नामक नाटक लिखकर रंगमंच में कदम रखा। उनके लिखे नाटकों में ओके टाटा बाय बाय... को लंदन के रॉयल कोर्ट में प्रदर्शित किया गया था, जिसमें आयशा धारकर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इसे लीसेस्टर के द कर्व में भी दिखाया गया। इस नाटक ने लाडली मीडिया अवाॅर्ड जीता था। उन्हें प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार-2015 से नवाजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि अपनी खुद की थिएटर कंपनी शुरू करने से पहले, मैंने एक कार्यकारी निर्माता के तौर पर राकेश रोशन और रिलायंस मोशन पिक्चर्स के साथ मिलकर बड़े और मध्यम बजट की फिल्मों का निर्माण भी किया।
इन मशहूर नाटकों में लेखन और निर्देशन
पूर्वा ने पिंक साड़ी रिवॉल्यूशन नाटक लिखा, जिसे यूके आर्ट्स काउंसिल के रीइमेजिन इंडिया ग्रांट के तहत लीसेस्टर में प्रदर्शित किया गया। उन्होंने उमराव का लेखन व निर्माण किया। दो लघु नाटक आबो दाना और आवाज़ें के साथ पशु लिखा। आज रंग है... को लिखने के साथ ही सह निर्देशन भी किया। बंदिश लिखा और निर्देशित किया। इसे भारंगम फेस्टिवल्स में प्रदर्शित किया गया। इसमें शुभा मुद्गल का संगीत है। पूर्वा ने बताया कि लेडीज़ संगीत नामक नाटक को लिखा और निर्देशित किया। हब्बा खातून पर आधारित नाटक रोशे रोशे लिखा और निर्देशित किया। इसके अलावा चांदनी रातें... लिखा और निर्देशित किया। यह दोस्तोवस्की के उपन्यास व्हाइट नाइट्स का नाट्य रूपांतरण है। इसने मेटा में सर्वश्रेष्ठ संगीत का पुरस्कार जीता था। इस वर्ष इसे प्रतिष्ठित रूसी फेस्टिवल में भी आमंत्रित किया गया है। मिथ्या, क्रिमिनल जस्टिस और कर्मा कॉलिंग कर्मा, दम मारो दम और हंसी तो फंसी जैसी फिल्मों के लिए पूर्वा ने संवाद भी लिखे हैं।