लखनऊ। सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो... जैसे गीतों पर ढोल की थाप के साथ जमकर भंगड़ा और गिद्दा हुआ। लोहड़ी के पर्व पर शहर में रौनक छाई रही। पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और मक्के के दाने अर्पित कर सिख और सिंधी समाज के लोगों ने घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद शाम को पंजाबी गीतों पर लोग झूमे। शादीशुदा जोड़े और नवजात शिशुओं की पहली लोहड़ी वाले परिवारों में जश्न धूमधाम से मनाया गया।
गुरुद्वारा नाका हिंडोला स्थित खालसा इंटर कॉलेज में लोहड़ी और मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। विद्यालय परिसर झालरों और पतंगों से सजा था। छात्राओं ने रंगीन परिधानों में ढोल की थाप पर मनमोहक भंगड़ा नृत्य प्रस्तुत किया। सजी रंगोली के बीच अलाव जलाकर विद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र सिंह बग्गा, प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह और नाका क्षेत्र के वरिष्ठ व्यापारी राजेंद्र सिंह दुआ ने अग्नि में तिल, रेवड़ी, गुड़, मूंगफली अर्पित की।
राजेंद्र सिंह बग्गा ने बताया कि पंजाब में यह विशेष खुशी का त्योहार है, जिसे परिवार में नई शादी या बच्चे के जन्म पर मनाया जाता है। लोग अलाव जलाकर अग्नि में गुड़, तिल, रेवड़ी, मूंगफली आदि अर्पित करते हैं और ढोल की थाप पर भंगड़ा, गिद्दा के साथ खुशी का इजहार करते हैं। उन्होंने दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कथा का भी उल्लेख किया।
कथा के अनुसार, दुल्ला भट्टी ने मुगल काल में जुल्म सह रहीं दो बहनों को मुक्त कराकर उनका विवाह कराया था। तभी से सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो... जैसे लोकगीत गाकर उन्हें याद किया जाता है। अतिथियों और बच्चों को रेवड़ी, मूंगफली व मक्के के दाने बांटे गए।
नाका गुरुद्वारा में गूंजे कीर्तन
नाका हिंडोला स्थित गुरुद्वारे में लोहड़ी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। शाम को दीवान सजा और रहिरास साहिब के पाठ के बाद कीर्तन हुआ। ज्ञानी गुरमीत सिंह ने लोहड़ी पर्व का इतिहास बताया। पीआरओ आज्ञा पाल सिंह ने बताया कि 14 के दीवान की समाप्ति के बाद गुरु का लंगर लगेगा। मनमीत सिंह बंटी, प्रधान डॉ. अमरजोत सिंह आदि मौजूद रहे। अन्य गुरुद्वारों में भी श्रद्धालुओं ने माथा टेका और शाम को लोहड़ी मनाई। चंदरनगर समेत अन्य गुरुद्वारों के बाहर लोहड़ी जलाकर उत्सव मनाया। होटलों, लॉन और रेस्टोरेंट में भी लोहड़ी की पार्टी का आयोजन किया।
लोहड़ी का उल्लास छाया रहा। कलोजों के अलावा कॉलोनियों में भगड़ा हुआ। गुरुद्वारों में दीवान सजे।
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