फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुना है क्या: मंत्री को चुनाव की चिंता की कहानी, साथ ही मामला लीगल है और मैडम के आने से पहले चर्चाएं के किस्से

Tue, 21 Apr 2026 11:35 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
Register For Event
विज्ञापन
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'मंत्रीजी को सताने लगी चुनाव की चिंता' की कहानी। इसके अलावा 'मामला लीगल है...' और 'मैडम के आने से पहले ही चर्चाएं' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

मंत्रीजी को सताने लगी चुनाव की चिंता

मंत्रीजी समीक्षा बैठक कर रहे थे। अपने विभाग के आला अफसर के सामने अपनी पीड़ा बताई। वह इतने पीड़ित थे कि खुद के बैठने का स्थान भूल गए। यह भी नहीं समझ पाए कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पूरे प्रदेश के अफसर जुड़े हैं। मंत्रीजी ने कहा कि आप खुद को ईमानदार और कर्तव्यपरायण मानते हैं लेकिन मैं फील्ड में था। लोग कह रहे हैं कि यह अफसर विभाग में बना रहा तो चुनाव हार जाएंगे। अब आप ही बताइए कि क्या करें? तभी दूसरे अफसर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग चालू होने की ओर इशारा किया लेकिन तब तक मंत्रीजी की पीड़ा सार्वजनिक हो चुकी थी। अब चर्चा है कि जो अफसर अभी तक मंत्रीजी का इतना खास था, वह अचानक चुनाव हराने में क्यों जुट गया है?

मामला लीगल है...

लंबी-चौड़ी सड़कें बनाने वाले एक विभाग में इन दिनों खलबली मची है। क्यों...ये पता सबको है लेकिन कोई मुंह खोलना नहीं चाहता। मामला ही ऐसा है कि हां किया तो फंसेंगे, न कर नहीं सकते। खुसफुसाहट जोरों की है कि मामला धन-धनाधन का है। सड़क बनाने का सौदा जितने में किया गया, उससे कम में काम हो गया लेकिन दबाव फुल पेमेंट का है। फुल पेमेंट करते ही फुल इन्क्वायरी की पूरी गारंटी है। इसलिए सभी चुप्पी साधे बैठे हैं।

मैडम के आने से पहले ही चर्चाएं

ब्यूरोक्रेसी में हाल में बड़े पैमाने पर तबादले हुए हैं। इसमें प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में आने वाली एक मैडम की पहुंचने से पहले ही चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कोई यहां उनकी तैनाती को प्रमोशन तो कोई डिमोशन बता रहा है। सबसे ज्यादा खुश वे अधिकारी हैं जो अभी तक उपेक्षित चल रहे थे। हालांकि, मैडम के काम करने का तरीका उन्हें पता नहीं है। ऐसे में उनकी यह खुशी क्षणिक भी हो सकती है। खैर, विभाग में मैडम के आने की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। अब मैडम किसको तवज्जो देंगी यह तो समय ही बताएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें