मरीज के परचे पर लिखा गया निजी लैब का नाम।
लखनऊ। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मरीजों को बाहर की दवा, जांच लिखने पर सरकारी डॉक्टरों के निलंबन का फरमान सुनाया है। हालांकि, डॉक्टरों में इसका खौफ नहीं हैं। क्वीनमेरी के डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर निजी लैब का नाम लिखकर जांच के लिए भेज रहे हैं। यह स्थिति तब है जब संस्थान में ही जांच की सुविधा है। उधर, जिम्मेदार अफसर आंखें मूंदें हैं।
क्वीनमेरी में प्रदेशभर से गर्भवती महिलाएं व मरीज आती हैं। इन्हें सस्ता और बेहतर इलाज मुहैया कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। मरीजों को खुलेआम बाहर की दवाएं व जांच लिखी जा रही हैं। हालत तो यह है कि पर्चे पर बकायदा निजी लैब का नाम तक लिखा जा रहा है।
बृहस्पतिवार को आशा नाम की मरीज का ब्लड सैंपल निकाला गया। उनके गुलाबी पर्चे पर शिक्षा भवन के पास स्थित नेशनल पैथोलॉजी का नाम लिखा था। तीमारदार को पर्चा व सैंपल थमाकर वहां भेज दिया गया। तीमारदार लैब की खोज में भटकता रहा।
एचआरएफ काउंटर पर दवाएं नहीं, बाहर से मंगवा रहे
अस्पताल में भर्ती गर्भवती को बाहर की दवाएं भी लिखी जा रही हैं। ये वे दवाएं हैं जो एचआरएफ काउंटर पर उपलब्ध नहीं हैं। बिहार की श्याम प्यारी के तीमारदार को थमाई गई पर्ची पर दो प्रकार की दवाएं लिखी थीं। ये दवाएं क्वीनमेरी चौराहे के पास के एक मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। काफी मरीजों को इस मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखी जा रही हैं। डॉक्टरों का सिडिकेट नहीं तोड़ पा रहे अफसर
केजीएमयू में डॉक्टरों और निजी पैथोलॉजी-डायग्नोस्टिक सेंटर का बड़ा सिडिकेट है। एजेंटों के इशारे पर डॉक्टर मरीजों को महंगी जांचें लिख रहे हैं। यही वजह है कि केजीएमयू में पैथोलॉजी व दर्जनों कलेक्शन सेंटर होने के बाद भी निजी पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक केंद्रों पर भीड़ लगी रहती है। अफसर गरीब मरीजों को बाहर की जांच लिखने वालों पर नकेल नहीं कस पा रहे हैं।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ केके सिंह का कहना है कि क्वीनमेरी में मरीज के परचे पर निजी लैब का नाम लिखकर जांच कराए जाने का मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो डॉक्टर इसमें शामिल होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।