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यूपी चुनाव 2022: संकल्प मोर्चा में शामिल हो सकते हैं चंद्रशेखर आजाद व मुकेश सहनी, राजभर ने की मुलाकात

Sun, 19 Sep 2021 01:52 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद से 21 सितंबर को फिर मुलाकात होगी। इसके बाद उनके भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल होने की घोषणा की जा सकती है।
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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद व ओम प्रकाश राजभर। (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ मोर्चा संभालने के लिए विभिन्न पार्टियों को मिलाकर गठित भागीदारी संकल्प मोर्चा की ताकत बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। शनिवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी और आजाद समाज पार्टी (आसपा) के अध्यक्ष चंद्रशेखर के बीच चुनाव की रणनीति पर चर्चा हुई। राजभर ने आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह से भी मुलाकात की है, लेकिन उनकी ओर से मोर्चा में शामिल होने को लेकर कोई संकेत नहीं दिए गए हैं।

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ओमप्रकाश ने बताया कि वीआईपी और आसपा के नेताओं ने अलग-अलग मुलाकात में मोर्चा में शामिल होकर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को फिर से आसपा अध्यक्ष से मुलाकात होनी है।

उम्मीद है कि इसके बाद उनके मोर्चा में शामिल होने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। जबकि वीआईपी के अध्यक्ष भी जल्द ही मोर्चा में शामिल होने की घोषणा करेंगे। उनका कहना है कि अगर ये दोनों दल शामिल होते हैं तो मोर्चा में शामिल होने वाले दलों की संख्या बढ़कर 11 हो जाएगी। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने सुझाव दिया कि अक्तूबर में एक बड़ी रैली करके मोर्चा को मजबूत करने का एलान किया जाए।

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इसलिए मजबूत विकल्प की जरूरत

मुलाकात के दौरान मौजूद रहे वीआईपी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटन राम निषाद ने बताया कि चुनाव से पहले दिल्ली, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल की तरह यूपी, बिहार व झारखंड में भी निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, नोनिया, धीवर, कश्यप को अनुसूचित जाति का आरक्षण देने के साथ ही परंपरागत अधिकार देने की मांग केंद्र सरकार से की जा रही है, लेकिन उनके स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। इसलिए विकल्प के तौर पर एक मजबूत मंच की जरूरत है।

प्रभावित कर सकते हैं कई सीटों के समीकरण
सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि अगर ये सभी नेता मिलकर प्रदेश में चुनाव लड़ेंगे तो पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को प्रभावित करेंगे। साथ ही पूर्वांचल व बुंदेलखंड की कई सीटों पर सियासी समीकरण भी प्रभावित कर सकते हैं। भागीदारी संकल्प मोर्चा की रणनीति है कि सभी दल मिलकर निषाद, राजभर, प्रजापति, कुशवाहा सहित अन्य जातियों को एकजुट किया जाए।
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