लखनऊ। माफिया मुख्तार अंसारी के पार्टनर शादाब अहमद की जमानत अर्जी भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट के विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने खारिज कर दी। शादाब पर मुख्तार के साथ मिलकर काले धन को सफेद करने का आरोप है।
कोर्ट में आरोपी की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए प्रवर्तन निदेशालय की ओर से बताया गया कि मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन के मालिक मसूद आलम व चार अन्य लोग थे। एक अगस्त 2012 को मुख्तार ने तीन साझेदारों को जबरन हटा दिया था। कंपनी पर कब्जा कर उसने पत्नी अफसा अंसारी को 60 प्रतिशत, दो साले आतिफ रजा, अनवर शाहजाद को 15-15 प्रतिशत, जाकिर हुसैन और रविंद्र नारायण सिंह को पांच-पांच प्रतिशत हिस्सेदार बना दिया था। बाद में मुख्तार और उसके साथियों ने विकास कंस्ट्रक्शन के जरिये रेनी गांव में सरकारी जमीन पर कब्जा करके गोदाम बनवाया।
इसी तरह गाजीपुर जनपद में भी कब्जा करके निर्माण कराया। दोनों कब्जोें को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोपियों ने कब्जा की गई जमीनों पर निर्मित गोदामों को भारतीय खाद्य निगम और उप्र राज्य भंडारण निगम को पट्टे पर दिया था। इससे एफसीआई मऊ से अगस्त 2013 से अक्टूबर 2020 के बीच नौ करोड़ 55 लाख 64 हजार 505 रुपये और यूपीएससीडबल्यू से 2016-2020 के बीच पांच करोड़ 75 लाख 41 हजार 531 रुपये मिले थे।
जांच में पता चला की आरोपी शादाब अहमद के मुख्तार अंसारी और उसके परिवार के करीबी रिश्ते थे। शादाब ही मुख्तार के परिवार से जुड़ी कंपनियों और फर्मों के मामलों का प्रबंधक था। सभी कंपनियों और निदेशकों पर उसका नियंत्रण रहता था। वह कंपनियों का अधिकृत हस्ताक्षरी भी था। शादाब ने कई अन्य कंपनियां भी बनाई थीं। शादाब ने अवैध रूप से मिले धन को सफेद करने के लिए इन सभी कंपनियों का प्रयोग किया।
कोर्ट में आरोप लगाया गया कि ईडी ने जांच के लिए आरोपी को बुलाया तो वह सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसे में एजेंसी ने 22 अक्तूबर को आरोपी को शारजाह से वापस आते हुए लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। आरोपी जांच से बचने के लिए लगातार देश से बाहर रह रहा था। उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था।