केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सक मरीज को इलाज तभी देते हैं, जब वह स्ट्रेचर पर लाया जाता है और फिलहाल ट्रॉमा में हालात ऐसे हैं कि स्ट्रेचर के लिए अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है। कभी-कभार तो घंटेभर की दौड़ लगानी पड़ती है। यानी मरीज की हालत चाहे जितनी गंभीर हो जल्द इलाज चाहते हैं तो स्ट्रेचर जल्द लाना होगा। ऐसे में अब मरीजों के परिवारीजनों का ही सवाल है कि क्या अपनों की जान बचाने के लिए स्ट्रेचर भी घर से ही लाना होगा।
नया मामला शनिवार का है। शाम करीब चार बजे जानकीपुरम निवासी शिव वर्मा की तबीयत खराब हो गई। उसका भाई सूरज उसे गंभीर हालत में लेकर ट्रॉमा कैजुअल्टी पहुंचा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिसिन विभाग में शिफ्ट किया जाना था।
भाई का आरोप है कि डॉक्टर व कर्मचारी उसे स्ट्रेचर लेने के लिए पांचवें तल तक दौड़ाया मगर कहीं भी स्ट्रेचर नहीं मिला। वहीं कैजुअल्टी स्टाफ बेड खाली कराने के लिए मरीज को जबरन बाहर किए जाने की धमकी दे रहे थे। ऐसी हालत तब है जब ट्रॉमा सेंटर में 200 से अधिक स्ट्रेचर उपलब्ध हैं।
हंगामा मचा तो थमा दिया टूटा स्ट्रेचर
जब एक घंटे तक स्ट्रेचर नहीं मिला तो मरीज के भाई ने कैजुअल्टी में हंगामा शुरू कर दिया। मामले की शिकायत ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. हैदर अब्बास से की तो उनके निर्देश के बाद मेडिसिन विभाग के कर्मचारी ने टूटी स्ट्रेचर थमा दी। तीमारदार ने केजीएमयू प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आला अधिकारियों से शिकायत की बात कही है।