लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को विकसित भारत के लिए उच्च शिक्षा विषय पर संगोष्ठी हुई। कार्यक्रम चार सत्रों में हुआ। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि नए विधेयक के तहत यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई की जगह एक एकीकृत व्यवस्था बनेगी। इससे पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ेगी। विशिष्ट अतिथि एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख किया। मुख्य वक्ता प्रो. राज शरण शाही रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अशोक मोरल ने की। संगोष्ठी में बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा व सीतापुर से आए प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर प्रो. वंदना सहगल, अभाविप के प्रांत संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी, प्रो. भुवनेश्वरी भारद्वाज, प्रो. शशि भूषण, घनश्याम शाही, प्रो. नीतू सिंह, प्रो. मंजुला उपाध्याय समेत कई लोग मौजूद रहे।