लखनऊ। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन से ऑर्डर के विपरीत दूसरा लैपटॉप भेजने और पैसे वापस न करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए अमेजन को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता को लैपटॉप की पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए।
इसके साथ ही, मानसिक उत्पीड़न के 15 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए पांच हजार रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को यह भुगतान आदेश जारी होने के 30 दिनों के भीतर करना होगा। गोमतीनगर विस्तार निवासी श्रेयांश त्रिवेदी ने 10 मई 2023 को अमेजन से 84,840 रुपये की कीमत का लैपटॉप ऑर्डर किया था। 16 मई 2023 को जब डिलीवरी हुई, तो पैकेट में वह लैपटॉप नहीं था, जो उन्होंने मंगाया था। श्रेयांश ने इसकी शिकायत की, जिसे 22 मई को अमेजन ने सत्यापित भी कर लिया। इसके बावजूद, बार-बार ई-मेल और संपर्क करने पर भी कंपनी ने न तो लैपटॉप बदला और न ही पैसे वापस किए।
इस पर उपभोक्ता ने अमेजन सेलर सर्विसेज और अमेजन रिटेल इंडिया के खिलाफ जुलाई 2025 में उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। आयोग के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी औरसदस्य प्रतिभा सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि विपक्षी कंपनियों ने जानबूझकर सेवा में लापरवाही बरती। चूंकि विपक्षी की ओर से कोई ठोस पक्ष नहीं रखा गया, इसलिए आयोग ने एकपक्षीय फैसला सुनाया।